समस्त रोगों की जड़ है रात्रि भोजन – आयुर्वेदिक जीवनशैली का रहस्य
समस्त रोगों की जड़ है रात्रि भोजन – आयुर्वेदिक जीवनशैली का रहस्य
समस्त रोगों की जड़: रात्रि भोजन का रहस्य
क्या आपने कभी सोचा है कि न पक्षियों को डायबिटीज होती है, न बंदरों को हार्ट अटैक, न ही जंगली जानवरों को थायराइड या दांतों की बीमारी?
वे न आयोडीन वाला नमक खाते हैं, न टूथब्रश इस्तेमाल करते हैं, फिर भी स्वस्थ रहते हैं।
तो मनुष्य ही बीमार क्यों?
मनुष्य और बंदर की शारीरिक संरचना लगभग समान है, केवल पूँछ का अंतर है। फिर भी बंदरों को न हाई BP, न हार्ट अटैक, न डायबिटीज! क्यों?
वैज्ञानिक अध्ययन: बंदर बीमार क्यों नहीं होते?
एक प्रसिद्ध मेडिकल प्रोफेसर ने 15 वर्षों तक बंदरों पर शोध किया।
उन्होंने उनके शरीर में कई प्रकार के वायरस, बैक्टीरिया और शुगर इंट्रोड्यूस किए, पर बंदर बीमार नहीं पड़े।
आखिर क्यों?
🔹 कारण: बंदर का प्राकृतिक RH factor
प्रोफेसर बताते हैं—
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बंदरों का RH factor सबसे आदर्श होता है।
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उनका शरीर किसी भी वायरस या अतिरिक्त शुगर को टिकने नहीं देता।
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उनका कोलेस्ट्रॉल, ट्रायग्लिसराइड और ब्लड शुगर कभी नहीं बढ़ता।
लेकिन सबसे बड़ा कारण है—उनकी भोजन दिनचर्या।
बंदर सुबह-सवेरे ही भरपेट खाना खाते हैं।
दिन ढलने के बाद वे कुछ नहीं खाते।
ठीक यही दिनचर्या पक्षियों और सभी जंगली जीवों की होती है।
जब से मनुष्य “ब्रेकफास्ट–लंच–डिनर” के चक्कर में फँसा…
तभी से बीमारियों की बाढ़ आ गई—
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डायबिटीज
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हाई BP
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हार्ट अटैक
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थायराइड
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मोटापा
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गैस
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अनिद्रा
ये सब असमय खाने और विशेषकर रात्रि भोजन की देन हैं।
प्रोफेसर रवींद्रनाथ शानवाग की सलाह
उन्होंने अपने सभी मरीजों से कहा:
“सुबह-सुबह भरपेट भोजन करो।”
परिणाम चौंकाने वाले थे—
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डायबिटीज कम
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कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित
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घुटनों और कमर का दर्द कम
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गैस और जलन समाप्त
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नींद बेहतर
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ऊर्जा में वृद्धि
आयुर्वेद की प्राचीन शिक्षा
3500 वर्ष पूर्व आचार्य बागभट्ट ने भी कहा था—
“सुबह का भोजन सर्वोत्तम, दोपहर का सामान्य और रात्रि भोजन न्यूनतम करो।”
आयुर्वेद के अनुसार:
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सूर्य निकलने के ढाई घंटे के भीतर (लगभग 9:30–10 बजे तक) भरपेट भोजन कर लें।
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नाश्ते की परंपरा भारतीय संस्कृति में नहीं थी—यह अंग्रेजों की देन है।
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सूर्यास्त से कम से कम आधा घंटा पहले रात्रि भोजन कर लें।
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दो भोजन के बीच 4–6 घंटे का अंतराल रखें।
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सूर्य डूबने के बाद कुछ भी न खाएँ।
इसका कारण:
हमारी जठराग्नि का संबंध सूर्य से है।
सूर्य जितना तेज, पाचन शक्ति उतनी प्रबल।
इसलिए सुबह का भोजन सबसे अच्छे से पचता है।
पक्षियों और जंगली जीव क्यों नहीं होते बीमार?
क्योंकि उनकी दिनचर्या में—
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सूर्योदय पर भोजन
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सूर्यास्त के बाद पूर्ण उपवास
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प्राकृतिक आहार
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शारीरिक सक्रियता
यह सब स्वाभाविक रूप से शामिल है।
कहानी की शिक्षा
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रात्रि भोजन कई रोगों की जड़ है।
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सुबह भरपेट, दिन में हल्का और रात को कम से कम खाएँ।
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आयुर्वेदिक दिनचर्या अपनाएँ, रोगों से बचें।
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सूर्य के अनुसार भोजन करें—यही प्राकृतिक स्वास्थ्य नियम है।
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