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मूलेठी चूर्ण खाने के फायदे

मूलेठी चूर्ण खाने के फायदे मूलेठी (मुलेठी) आयुर्वेद में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होने वाली एक औषधीय जड़ है। इसका वानस्पतिक नाम Glycyrrhiza glabra है। इसका स्वाद प्राकृतिक रूप से मीठा होता है और इसका उपयोग खाँसी, गले में खराश तथा पाचन से जुड़ी कुछ समस्याओं में किया जाता रहा [...]

मणिबंध रेखाएं क्या बताती हैं? जानिए हथेली और कलाई के जोड़ पर 1, 2 या 3 रेखाओं का रहस्य

मणिबंध रेखाएं क्या बताती हैं? जानिए हथेली और कलाई के जोड़ पर 1, 2 या 3 रेखाओं का रहस्य हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की विभिन्न रेखाओं के साथ-साथ मणिबंध रेखाओं का भी विशेष महत्व बताया गया है। ये रेखाएं कलाई और हथेली के जोड़ पर दिखाई देती हैं। पारंपरिक हस्तरेखा [...]

स्त्री स्वास्थ्य में शतावरी के योग: मासिक धर्म से रजोनिवृत्ति तक उपयोग और सावधानियाँ

स्त्री स्वास्थ्य में शतावरी के योग: मासिक धर्म से रजोनिवृत्ति तक उपयोग और सावधानियाँ शतावरी आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध औषधीय वनस्पति है, जिसका पारंपरिक रूप से स्त्री स्वास्थ्य और प्रजनन स्वास्थ्य के संदर्भ में उपयोग किया जाता रहा है। महिलाओं के जीवन में मासिक धर्म, प्रजनन काल और रजोनिवृत्ति जैसी [...]

कान पर बाल आने का क्या है मतलब? जानिए सामुद्रिक शास्त्र की मान्यताएँ और विज्ञान की राय

कान पर बाल आने का क्या है मतलब? जानिए सामुद्रिक शास्त्र की मान्यताएँ और विज्ञान की राय क्या कान पर बाल आना शुभ संकेत माना जाता है? सामुद्रिक शास्त्र की कुछ प्रचलित व्याख्याओं में शरीर की बनावट और विभिन्न अंगों की विशेषताओं को व्यक्ति के स्वभाव एवं भाग्य से जोड़कर [...]

शतावरी योग की तुलना: स्त्री स्वास्थ्य, स्तन्यवृद्धि और बलवर्धन के लिए कौन-सा योग उपयोगी है?

शतावरी योग की तुलना: स्त्री स्वास्थ्य, स्तन्यवृद्धि और बलवर्धन के लिए कौन-सा योग उपयोगी है? आयुर्वेद में शतावरी को पारंपरिक रूप से बल्य, रसायन और स्तन्यजनन गुणों वाली औषधीय वनस्पति माना जाता है। इसका उपयोग महिलाओं के पोषण, स्तनपान, प्रजनन स्वास्थ्य और सामान्य दुर्बलता के संदर्भ में किया जाता रहा [...]

जपमाला के मनकों का गूढ़ रहस्य: 108, 54, 27, 11 और 51 का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्त्व

जपमाला के मनकों का गूढ़ रहस्य: 108, 54, 27, 11 और 51 का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्त्व सनातन धर्म में मंत्र-जप का विशेष महत्त्व है। जपमाला केवल मनकों का समूह नहीं, बल्कि साधना में एकाग्रता, अनुशासन और निरंतरता बनाए रखने का माध्यम भी है। परंपराओं में 108, 54, 27, 11 [...]