80 प्रकार के वात रोगों को जड़ से मिटाने वाला आयुर्वेदिक प्रयोग
🌿 80 प्रकार के वात रोगों को जड़ से मिटाने वाला आयुर्वेदिक प्रयोग
“वात दोष संतुलित हो तो जीवन स्वस्थ और दीर्घायु होता है।”
आयुर्वेद में वात रोगों का इलाज प्राकृतिक औषधियों और दिनचर्या से संभव माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में वर्णित यह विशेष लहसुन-आधारित प्रयोग 80 प्रकार के वात रोगों को जड़ से मिटाने में सहायक है।
🌟 प्रमुख वात रोग
वात दोष के असंतुलन से ये रोग उत्पन्न हो सकते हैं:
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पक्षाघात (लकवा)
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अर्दित (मुँह का लकवा)
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गृध्रसी (सायटिका)
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जोड़ों का दर्द, अकड़न, कम्पन
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स्पांडिलोसिस, गर्दन व कमर का दर्द
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हाथ-पैरों में सुन्नता
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अस्थिच्युत (डिसलोकेशन) व अस्थिभंग (फ्रैक्चर)
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दमा, पुरानी खाँसी और अस्थिरोग
🕰️ प्रयोग का सही समय
आचार्य कश्यप के अनुसार पौष और माघ मास (22 दिसंबर – 18 फरवरी) इस औषधि का सेवन करने का उत्तम समय है।
🥣 औषधि बनाने की विधि
🔸 सामग्री
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लहसुन – 200 ग्राम (छीलकर पीस लें)
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गाय का दूध – 4 लीटर
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गाय का घी – कुल 450 ग्राम
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मिश्री – 400 ग्राम
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अन्य औषधियाँ (प्रत्येक 3-3 ग्राम):
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सोंठ, काली मिर्च, पीपल, दालचीनी, इलायची, तमालपत्र, नागकेशर, पीपरामूल, वायविडंग, अजवायन, लौंग, च्यवक, चित्रक, हल्दी, दारूहल्दी, पुष्करमूल, रास्ना, देवदार, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, शतावरी, विधारा, नीम, सोआ, कौंच बीज
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🔸 बनाने की विधि
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दूध में लहसुन और 50 ग्राम घी डालकर उबालें।
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मिश्रण गाढ़ा होने लगे तो मिश्री, शेष घी और सभी चूर्ण मिलाएँ।
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धीमी आँच पर लगातार चलाते रहें जब तक घी अलग न हो जाए और मिश्रण मावा जैसा गाढ़ा न बन जाए।
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ठंडा करके काँच की बोतल में भर लें।
🥄 सेवन विधि
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सुबह 10–20 ग्राम औषधि गाय के दूध के साथ लें।
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पाचन शक्ति उत्तम हो तो शाम को पुनः लें।
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माघ माह के अंत तक इसका सेवन करें।
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गंभीर रोगों में वैद्यकीय परामर्श लेकर एक वर्ष तक भी लिया जा सकता है।
⚠️ सावधानियाँ
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भोजन में मूली, खट्टे पदार्थ और अत्यधिक तेल-घी से बचें।
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पीने और स्नान के लिए गुनगुना पानी लें।
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योग, प्राणायाम और हल्की दिनचर्या अपनाएँ।
🌿 लाभ
✔ 80 प्रकार के वात रोगों में लाभकारी
✔ अस्थि-मांसपेशियों को मज़बूती
✔ रक्त संचार और पाचन में सुधार
✔ दमा और पुरानी खाँसी में सहायक
✔ लकवा रोगियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी
📌 संदेश:
“आयुर्वेद केवल लक्षणों को नहीं, बल्कि रोग की जड़ को समाप्त करता है। इस ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ, ताकि प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ सबको मिल सके।”
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