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काउंट डाउन शुरू

काउंट डाउन शुरू

मित्रों और प्यारे प्यारे बच्चो हमारा जन्मदिवस पिछले माह ही था यानी मेरी कुल आयु के 1 वर्ष और मेरी जिंदगी से घट गए। इसलिए आज हम कुछ नई बातें ही करते हे। और यह बात उन तमाम लोगो के लीए जो जीवन में कुछ करना चाहते हें। मित्रो जीवन में सबको आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होते ही हे। बस नजर भर पहचानने की जरुरत होती है।

एक नदी उफान पर जा रही है और उसके किनारे एक बहुत ऊँचा सा पेड़ हे।उसके सिरे पर एक बंदर और उसकी पत्नी धुप के मजे ले रहे हैं। अचानक क्या होता है कि एक भविष्य वाणी हुई की तुम दोनों अगर 5 मिनट के अंदर इस नदी को पार कर जाओ तो बंदर जो हे वो फरिश्ता मने देव पुरुष बन जयेगा और यह बंदरिया पऱी बन जायेगी और आप का समय शुरू होता है अब….

ऐसा कह कर काउंट डाउन शुरू कर दिया। अब साहब बंदरिया ने बन्दर से कहा चले उस पार मौका है हमारे पास जीवन बदलने का। बन्दर ने भी ऊपर के मन से हां कर दी। बंदरिया ने कहा कि में 1,2,3 करुँगी और हमें कूदना हे। बन्दर और बंदरिया दोनों कूदने को तैयार हुए गिनती 1,2,3 बोली गई और साहब बन्दरिया तो कूद गई नदी के आधे के लगभग पर बंदर नही कूदा और बैठ गया वही पर पुनः। इधर काउंट डाउन पूरा होने को है और बन्दरिया भी पूरी कोशिश में है की टाइम में उस पार पहुच जाए और वह पहुच भी गई अंत में।

और एक सुखद बात यह हुई की वह सचमुच में परी बन गई और उड़ने की ताकत भी आ गई उसमें और जादुई दण्ड भी आ गया। पर यह क्या बन्दर नही दिखा उसे। अब वह उड़ते हुए बन्दर के पास पहुची और पूछा की आप नही आये। तो बन्दर ने शर्मिन्दा होते हुए कहा कि मुझे यकीन ही नही था कि ऐसा भी हो सकता है।

उसने कहा कि में अब कूद जाऊ पर अब तो समय निकल गया।

तो परी ने उसे एक बहुत अच्छी बात कही की भले मानस तेरे कूदने और प्रयास में विफल होने से ऐसी कोई शर्त नही थी की आप डीग्रेड होकर कुत्ता या बिल्ली बन जाते और मान लो की हम फरिश्ता नही बनते तो भी बन्दर तो थे ही।

तो मेरे प्यारे बच्चो आप की भी एग्जाम आने वाली है।आप का भी काउंट डाउन शुरू हो चूका है और आप को भी जीवन में बहुत मेंहनत करनी है और नाम कमाना हे। अतः जाते जाते आप को हरिवंश राय बच्चन जी की एक बहुत अच्छी कविता सुनता हूं शीर्षक हे “अमर प्रेम” और

प्यार किसी को करना लेकिन

कह कर उसे बताना क्या।

अपने को अर्पण करना पर

और को अपनाना क्या।

गुण का ग्राहक बनना लेकिन

गा कर उसे सुनाना क्या।

मन के कल्पित भावों से

औरों को भ्रम में लाना क्या।

ले लेना सुगंध सुमनों की

तोड उन्हे मुरझाना क्या।

प्रेम हार पहनाना लेकिन

प्रेम पाश फैलाना क्या।

त्याग अंक में पले प्रेम शिशु

उनमें स्वार्थ बताना क्या

दे कर हृदय हृदय पाने की

आशा व्यर्थ लगाना क्या।।

तो बस अपना कार्य पूर्ण निष्ठा से करे। किसी से उम्मीद न रखे बस अपनी महनत पर भरोसा रखें।

 

Dr Ved Prakash

Nawada, Bihar

।।धन्यवाद।।

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