आयुर्वेदिक सिद्धांत के अनुसार हमारा शरीर तीन दोषों से मिलकर बना है
आयुर्वेदिक सिद्धांत के अनुसार हमारा शरीर तीन दोषों से मिलकर बना है वात, पित्त, कफ और सात धातुओं रस, रक्त, मांस, मेंद,अस्थि, मज्जा और शुक्र। आजकल के लोगों की जो समस्याएं हैं, वह बिगड़े हुए जीवन शैली का परिणाम है। हम प्रकृति के जितने करीब रहेंगे उतना ही स्वस्थ और निरोग रहेंगे और प्रकृति से जितनी दूरी रहेगी उतनी बीमारियां बढ़ती रहेगी। जीवन में स्वस्थ रहने के लिए कुछ बातों का ध्यान हमेशा रखा जाना चाहिए जैसे:
रात को जल्दी सोना,सुबह जल्दी जागना। सुबह में कम से कम 10000 कदम टहलना चाहिए। 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। योग, ध्यान और प्राणायाम का प्रतिदिन अभ्यास करना चाहिए। मन विचार और वाणी से किसी का अहित नहीं होना चाहिए। किसी भी रोग के जड़ में मंदाग्नि होता है यानी कि भोजन का सही से न पचना, जिसके कारण शरीर में आम विष की उत्पत्ति होती है, जो अनेक बीमारियों का कारक बनता है भविष्य में। तो स्वस्थ रहने की पहली शर्त यह है कि हमारा पाचन शक्ति बहुत ही मजबूत होना चाहिए कि हम जो कुछ खाएं वह पच जाए आसानी से। किसी भी व्यक्ति को स्नान करने से पहले और भोजन करने के तुरंत बाद मूत्र त्याग करने की आदत डालनी चाहिए, भोजन करने के बाद कुछ देर तक वज्रासन में बैठना चाहिए, सुबह का का नाश्ता राजकुमार की तरह, दोपहर का भोजन राजा की तरह और रात का खाना भिखारी की तरह खाना चाहिए यानी कि रात को कभी भोजन नहीं भी हुआ तो कोई बात नहीं। हमेशा सकारात्मक चिंतन करना चाहिए जिससे मन में आनंद का भाव बना रहे, क्योंकि जैसे दृष्टि होगी वैसा ही सृष्टि होती है। हमारे विचारों का हमारे शरीर पर, स्वास्थ्य पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। हम केवल पाचन तंत्र को ठीक रखें तो बहुत सारी बीमारियों से बचे रह सकते हैं।पेट ठीक तो सब ठीक। अब जो प्रश्न है कि खाते पीते बहुत हैं शरीर में हिम्मत नहीं रहती है तो यह प्रश्न कहीं ना कहीं यह बता रहा है कि हमारा पाचन ठीक नहीं है और जब पाचन ठीक नहीं होता है तो रस धातु सही नहीं बनती है और रस धातु के गड़बड़ होने से बाकी शरीर के छह धातुओं को पोषण नहीं मिलता है तो नाना प्रकार की बीमारियां शरीर में होती हैं। संसार का पहला औषधालय रसोई ही है उसमें कुछ परिवर्तन करके हम स्वस्थ रह सकते हैं, जैसे की सेंधा नमक का प्रयोग करें,रिफाइंड तेल की जगह शुद्ध सरसों का तेल उपयोग करें, लाल मिर्च का पाउडर ना के बराबर उपयोग करें सब्जी में। मैदा से बनी हुई चीज ना खाएं, फास्ट फूड जंक फूड से दूरी बनाकर रहे। अपने शरीर के कुल वजन का 10% मौसमी फल और सलाद अवश्य लें, सूखे मेवे को 5 घंटे पानी में भिगो के सेवन करें ताकि शरीर को पर्याप्त फाइबर्स और मिनरल्स वगैरा मिल सके। संभव हो तो चाय बिल्कुल ना लें और बिना चाय के नहीं रह सकते तो कम से कम लेने का प्रयास करें, वह एक धीमा जहर है शरीर के लिए। गैस और कब्ज सब रोगों की जननी है इसलिए अगर आप कब्ज और गैस की समस्या का लंबे समय से सामना कर रहे हैं, तो आगे से सावधान रहें। भविष्य में कोई बड़ा रोग हो सकता है तो इन से यथाशीघ्र मुक्त होने का उपाय करें। मैंने स्वस्थ रहने के यथासंभव उपाय बताने की कोशिश की है,इनको जीवन में उतारने का प्रयास करें और फिर जैसे-जैसे और चीज ध्यान में आएंगे मैं लिखता जाऊंगा। अभी के लिए इतना ही, आशा करता हूं आप लोगों को यह लेख पसंद आएगा। इस आलेख पर आपके सुझाव आमंत्रित हैं।
धन्यवाद।
