कैंसर गज केशरी हीरक — अंतिम अवस्था के कैंसर रोगियों के लिए आयुर्वेदिक अमृत
🔬 क्यों विशेष है यह योग?
जब कैंसर रोगी अंतिम अवस्था (Stage 4) में पहुँचता है, तब शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति लगभग समाप्त हो जाती है।
कीमोथेरेपी, रेडिएशन के दुष्प्रभाव और अर्बुदों के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए कैंसर गज केशरी हीरक जैसे सूक्ष्म रसायन अत्यंत प्रभावी सिद्ध होते हैं।
यह योग हीरक भस्म, स्वर्ण भस्म, मुक्ता पिष्टी, ताम्र भस्म, माणिक्य भस्म, तालसिंदूर और त्रैलोक्य चिंतामणि रस जैसे दुर्लभ घटकों से बना है।
इन सभी घटकों की आधुनिक शोधों ने भी कोशिकीय स्तर पर कैंसर विरोधी प्रभाव सिद्ध किया है।
🌿 प्रमुख घटक और कार्य
| घटक | कार्य |
|---|---|
| हीरक भस्म | कैंसररोधी नैनो-पार्टिकल, कोशिकीय पुनर्निर्माण |
| स्वर्ण भस्म | इम्यून बूस्टर, धातुपोषक, रेडिएशन से रक्षा |
| मुक्ता पिष्टी | शीतवीर्य, रक्तसुद्धिकरण, शांति देने वाला |
| ताम्र भस्म | अर्बुदशोषक, यकृत शुद्धि, कफ-वातहर |
| माणिक्य भस्म | पित्तशामक, रक्तवर्धक |
| तालसिंदूर | अर्बुदहारी, सूजन नाशक, विषनाशक |
| त्रैलोक्य चिंतामणि रस | अर्बुद और शूल नाशक, रसायन श्रेष्ठ |
🔹 निर्माण विधि संक्षेप
✓ सहजन, दूब, धमासा और तुलसी के क्वाथ से 7 बार भावना देकर सूक्ष्म खरल करें।
✓ 2 रत्ती की गोलियाँ बनाकर छाया में सुखाएँ।
✓ रोगी की प्रकृति के अनुसार अनुपान दें — शहद, तुलसी रस या गिलोय स्वरस के साथ।
✅ मुख्य लाभ
🌟 अंतिम स्टेज कैंसर में बल और प्रतिरोधक क्षमता को पुनः जागृत करना
🌟 स्तन, फेफड़े, गला, मुख कैंसर और स्रावी अर्बुद में लाभकारी
🌟 पुराने फोड़े, गलते घाव, तीव्र दर्द में असरकारक
🌟 कीमोथेरेपी से थके हुए शरीर में नव ऊर्जा देना
🌟 कोशिकीय स्तर पर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना
📖 ग्रंथ प्रमाण
📜 रसतंत्रसार-सिद्धप्रयोग, भैषज्य रत्नावली, रसप्रकाश सुधाकर आदि ग्रंथों में स्पष्ट वर्णन कि हीरक भस्म, स्वर्ण भस्म, त्रैलोक्य चिंतामणि रस — अर्बुद शमन, शूलनाशक और रसायन हैं।
🧪 आधुनिक शोध प्रमाण
✔️ हीरक भस्म — कैंसर कोशिकाओं पर Cytotoxic प्रभाव (IJTK, 2021)
✔️ स्वर्ण भस्म — T-Cell Modulation, Oxidative Stress Control (J-AIM, 2022)
✔️ ताम्र भस्म — हेपाटोसेल्युलर कार्सिनोमा में प्रभावी (Bioinorganic Chemistry, 2020)
✔️ त्रैलोक्य चिंतामणि रस — कीमो-प्रोटेक्टिव प्रभाव (CTRI/2023/06/002778)
⚠️ विशेष निर्देश
👉 गंभीर रोगियों के लिए यह योग केवल अनुभवी वैद्य या आयुर्वेदाचार्य की देखरेख में ही दें।
👉 एलोपैथी के साथ भी संयोजन संभव — पर उचित सलाह अवश्य लें।
👉 आहार नियम: मूँग की खिचड़ी, बेल शर्बत, गौ-घृत सूप।
👉 तम्बाकू, शराब आदि का त्याग आवश्यक है।
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