भगवान शिव को अत्यंत प्रिय 11 वस्तुएँ
🌺 भगवान शिव को अत्यंत प्रिय 11 वस्तुएँ
इन वस्तुओं को अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होकर पूरी करते हैं हर मनोकामना
🕉 “भोलेनाथ” यानी जो सहज ही प्रसन्न हो जाएँ। शिवजी को ‘आशुतोष’ इसी कारण कहा जाता है। शिव पुराण व अन्य ग्रंथों में बताया गया है कि यदि सही भाव से भगवान शिव की पूजा की जाए, तो वह शीघ्र फल देते हैं।
यहाँ प्रस्तुत हैं वे 11 पवित्र सामग्री जिन्हें भगवान शिव को अर्पित करने से विशेष पुण्य, कृपा और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है:
1. जल (Water)
भगवान शिव को जल अर्पण करना समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है। जब उन्होंने हलाहल विष पिया, तो उसकी ऊष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया।
👉 शिवलिंग पर जल अर्पण = जीवन में शांति और स्वास्थ्य।
2. बिल्वपत्र (Bael Leaves)
बिल्वपत्र शिव के त्रिनेत्र का प्रतीक है। तीन पत्तों वाला एक पत्र भगवान को अर्पित करना करोड़ों कन्याओं के कन्यादान के बराबर माना गया है।
👉 सबसे प्रिय पत्र, अभिषेक में प्रथम स्थान।
3. आंकड़ा (Aakda Flower)
एक आंकड़े का फूल चढ़ाना सोने के दान के समान पुण्यदायी है।
👉 यह फूल शिव पूजा में दुर्लभ किंतु अत्यंत शुभ माना गया है।
4. धतूरा (Datura Fruit)
धार्मिक व वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण। यह विषहर है और शरीर को ऊष्मा देता है।
👉 शिव को हलाहल पीने के बाद शांति देने वाली औषधियों में से एक।
5. भांग (Bhang)
भांग ध्यान केंद्रित करने वाली औषधि है। शिव ध्यानमग्न रहते हैं और भांग उन्हें परमानंद में रखती है।
👉 शिव हर कड़वाहट को आत्मसात कर लेते हैं, इसलिए यह प्रतीकात्मक अर्पण है।
6. कर्पूर (Camphor)
“कर्पूरगौरं करूणावतारं…” शिव की उपमा कर्पूर से दी गई है। इसकी सुगंध से वातावरण पवित्र होता है।
👉 शिव आरती और पूजन में आवश्यक।
7. दूध (Milk)
श्रावण मास में दूध का सेवन नहीं करने का विधान है लेकिन इसे शिव को अर्पित करना पुण्यदायी है।
👉 विष की ऊष्मा को शांत करने वाला शीतल अर्पण।
8. अक्षत (Unbroken Rice)
अक्षत यानी “जो टूटा न हो” — यह पूर्णता का प्रतीक है। किसी भी पूजा में इसकी महत्ता सर्वोपरि है।
👉 शिव पूजन में न हो तो पूजन अधूरा माना जाता है।
9. चंदन (Sandalwood)
चंदन शीतलता का प्रतीक है। शिव मस्तक पर त्रिपुंड लगाते हैं।
👉 चंदन चढ़ाने से सम्मान और यश में वृद्धि होती है।
10. भस्म (Sacred Ash)
भस्म मृत्यु की वास्तविकता और संसार की नश्वरता का बोध कराती है। शिव इसे शरीर पर लगाकर सबको यह संदेश देते हैं।
👉 भस्म शरीर की सभी इच्छाओं और अहंकार को शून्य करने का प्रतीक है।
11. रुद्राक्ष (Rudraksha)
शिव के नेत्रों से गिरे जल बिंदुओं से उत्पन्न रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र माना गया है।
👉 शिव की ऊर्जा का वाहक, भक्तों के लिए रक्षा कवच।
जो भक्त इन वस्तुओं के साथ श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
भोलेनाथ न केवल सरलता से प्रसन्न होते हैं, बल्कि अपने भक्तों के समस्त कष्ट भी हर लेते हैं।
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