Search for:

स्त्री पितृ दोष क्या होता है? जानिए इसके लक्षण और उपाय

🌹स्त्री पितृ दोष क्या होता है? जानिए इसके लक्षण और उपाय🌹

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष तब बनता है जब पूर्वजों की आत्माएँ असंतुष्ट रहती हैं। इसका मुख्य कारण पितरों का तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध विधि से न करना, मृत्यु उपरांत उचित क्रियाकर्म का अभाव या पूर्वजों का अपमान माना जाता है।
सामान्य धारणा यह है कि पितृ दोष केवल पुरुषों को प्रभावित करता है, लेकिन यह महिलाओं को भी प्रभावित कर सकता है। जब किसी स्त्री की कुंडली में यह योग बनता है तो उसे “स्त्री पितृ दोष” कहा जाता है।


⚜️स्त्री पितृ दोष क्या होता है?

स्त्री पितृ दोष तब होता है जब किसी स्त्री के पूर्वजों की आत्माएँ तृप्त नहीं होतीं, या घर की मातृ तुल्य स्त्री का अनादर किया गया हो। यह दोष तब भी उत्पन्न हो सकता है जब श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान जैसे कर्मकांड अधूरे रह जाते हैं।

इस दोष का प्रभाव महिलाओं के जीवन पर पड़ता है, जिससे विवाह में अड़चनें, संतान सुख में बाधा, वैवाहिक अशांति और परिवार में लगातार बीमारी जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।


⚜️लड़कियों की कुंडली में स्त्री पितृ दोष के प्रभाव

🚩 करियर में बाधाएँ – नौकरी या व्यवसाय में रुकावटें।
🚩 आर्थिक संकट – बार-बार धन की तंगी।
🚩 विवाह में देरी – रिश्ते टूटना या विवाह टलना।
🚩 संतान सुख में कमी – गर्भधारण में समस्या या गर्भपात।
🚩 पारिवारिक कलह – घर में झगड़े और असामंजस्य।
🚩 मानसिक परेशानी – तनाव, अवसाद और बार-बार बीमार रहना।


⚜️स्त्री पितृ दोष के कारण

🚩 पूर्वजों का श्राप – पूर्वजों की नाराज़गी या श्राप।
🚩 अधूरे कर्मकांड – श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान का अधूरा रहना।
🚩 बुजुर्गों का अपमान – माता-पिता या बड़े-बुजुर्गों का अनादर करना।


⚜️स्त्री पितृ दोष निवारण के उपाय

🌿 प्रतिदिन पितृ गायत्री मंत्र का जाप करें।
🌿 अमावस्या के दिन खीर का भोग लगाएँ और दान करें।
🌿 पीपल वृक्ष पर जल चढ़ाएँ और “ॐ पितृभ्यः नमः” मंत्र जपें।
🌿 गरीबों को भोजन कराएँ और गाय, कुत्ते, कौवे को अन्न खिलाएँ।
🌿 किसी पवित्र नदी में जाकर तर्पण व श्राद्ध करें।
🌿 भगवान शिव की पूजा और दुर्गा सप्तशती पाठ करें।
🌿 किसी योग्य ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण कराकर विशेष पूजा करवाएँ।


स्त्री पितृ दोष केवल एक ज्योतिषीय योग नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों की असंतुष्टि का संकेत है। उचित कर्मकांड, श्रद्धा, दान-पुण्य और भगवान की भक्ति से इसे दूर किया जा सकता है और जीवन में शांति व समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।

Loading

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required