क्या लोग हमारा इस्तेमाल करते हैं? सच्चाई इससे कहीं गहरी है | एक प्रेरक सच्ची घटना
काम कौन करता है और इस्तेमाल कौन करता है?
हम अक्सर कहते हैं—
“लोग मेरा इस्तेमाल कर लेते हैं।”
लेकिन क्या सच में सामने वाला हमें इस्तेमाल करता है,
या कहीं हम स्वयं अनुमति दे देते हैं?
असल सच्चाई यह है—
👉 कोई किसी का इस्तेमाल तब तक नहीं कर सकता, जब तक व्यक्ति खुद न चाहे।
👉 इंसान तभी इस्तेमाल होता है जब वह या तो दिल का साफ़ होता है, या फिर उसे किसी काम की उम्मीद होती है—चाहे वह पॉजिटिव हो या निगेटिव।
इन्हीं भावनाओं से जुड़ा एक अनुभव मुझे हमेशा सोचने पर मजबूर करता है।
एक सच्ची घटना जिसने मुझे भीतर तक झकझोर दिया
कुछ समय पहले एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुझसे एक दस्तावेज़ माँगा।
काम सरल था—और मैंने उसी सहजता से वह काम कर दिया।
लेकिन जैसे ही मैंने उसे दस्तावेज़ दिया,
वह दूसरे अधिकारी से हँसकर बोला—
“देखा? कैसे मैंने अपना काम निकलवा लिया!”
उसकी बात सुनकर क्षणभर को मन ठहर गया।
लगा जैसे मेरे काम को सम्मान नहीं, बल्कि मेरी सादगी को कमजोरी समझा गया है।
मैं सोचने लगा—
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गलती किसकी है?
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काम करके देने वाले की?
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या काम निकलवाने वाले की?
धीरे-धीरे एहसास हुआ—
गलती किसी की नहीं… गलती सोच की है।
आज के समय में लोग—
❌ काम करने वाले को सीधा-साधा समझते हैं
❌ उसकी ईमानदारी को मूर्खता समझते हैं
❌ और तारीफ़ उस व्यक्ति की करते हैं जिसने “काम निकाल लिया”
जबकि असली सम्मान तो उस व्यक्ति का होना चाहिए
जो बिना लालच, बिना दिखावे, दिल से अपना काम करता है।
क्या हम इस्तेमाल हुए? या हमने खुद होने दिया?
इस्तेमाल वही लोग होते हैं—
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जो दिल से काम करते हैं
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जिनमें कर्तव्यनिष्ठा होती है
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जो उम्मीद नहीं रखते
लेकिन असलियत यह नहीं कि लोग उनका फायदा उठाते हैं।
असल बात यह है—
👉 हम अपनी अच्छाई किसी के शब्दों से कम नहीं कर सकते।
👉 सादगी कमजोरी नहीं—बल्कि एक ताकत है, जिसे हर कोई समझ नहीं पाता।
जिसे यह बात समझ में आती है—वह औरों से अलग होता है।
जिसे नहीं आती—वह दूसरों को कम आंककर खुद को बड़ा समझता है।
जिंदगी की सच्चाई एक पुरानी कहावत में छुपी है
“गेहूं की रोटी अमीर भी खाता है और गरीब भी,
लेकिन फर्क है—दोनों खाते कैसे हैं।”
काम भी कुछ ऐसा ही है—
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काम सब करते हैं
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लेकिन किस भाव से करते हैं, यही इंसान का चरित्र बताता है
कुछ लोग काम निकलवाकर गर्व करते हैं,
और कुछ लोग काम करके संतोष पाते हैं।
फर्क बस इतना सा है।
काम करना सम्मान है, कमजोरी नहीं
आज की दुनिया में इज्जत काम निकलवाने वाले को मिलती है,
लेकिन असली ताकत काम करने वाले के पास होती है।
याद रखिए:
⭐ ईमानदारी एक ताकत है
⭐ सादगी एक कला है
⭐ कर्तव्यनिष्ठा एक गुण है
और यह सब हर इंसान के पास नहीं होते।
यदि कोई आपकी अच्छाई को कमजोरी समझता है,
तो समस्या आपके स्वभाव में नहीं, उसकी सोच में है।
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