Search for:

मासिक शिवरात्रि आज

मासिक शिवरात्रि आज

हिंदू पंचांग में प्रत्येक महीने आने वाली शिवरात्रि को मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। यह व्रत पूरे वर्ष भगवान शिव की उपासना का एक प्रमुख अवसर माना जाता है। मार्गशीर्ष मास में आने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है, क्योंकि यह कालखंड देव पूजा, साधना और शिव तत्त्व के अनुभव के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्तगण इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और शिवलिंग का विशेष पूजन कर अपनी मनोकामनाओं की सिद्धि की प्रार्थना करते हैं।
मार्गशीर्ष मास की मासिक शिवरात्रि कब है?
=============================
मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 18 नवंबर 2025, सुबह 7 बजकर 12 मिनट से प्रारंभ होकर 19 नवंबर, सुबह 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, निशा काल (रात्रि का समय) भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है, इसलिए इस बार मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा 18 नवंबर 2025 की रात को संपन्न की जाएगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त
===============
मार्गशीर्ष मासिक शिवरात्रि में रात का समय शिव आराधना का सर्वोत्तम माना जाता है। निशीथ काल में शिवलिंग का अभिषेक और मंत्रोच्चार अत्यंत पुण्यकारी होता है। भक्तजन इस काल में बेलपत्र, दूध, दही, शहद, जल और गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। शुभ मुहूर्त में किए गए जलाभिषेक व पूजन से विशेष रूप से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और संकटों से मुक्ति की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि
==========
दिन भर के व्रत के दौरान श्रद्धालुओं को संयम, सात्त्विकता और शुद्ध आचरण का पालन करना चाहिए। शाम के समय भगवान शिव के समक्ष दीप प्रज्वलित कर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जाता है। उसके बाद शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प और चंदन भगवान शिव के प्रिय माने जाते हैं, इसलिए इन्हें अवश्य अर्पित करना चाहिए। रात्रि में चार प्रहर की पूजा का भी विशेष महत्व है। आखिरी प्रहर की पूजा को अत्यंत फलदायक माना जाता है।
व्रत का महत्व
===========
मार्गशीर्ष मासिक शिवरात्रि का व्रत मनोकामना पूर्ति, वैवाहिक सुख, स्वास्थ्य लाभ और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत व पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शिव कृपा से इच्छित फल की प्राप्ति होती है।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद

Loading

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required