सांता लूसिया का जन्म दिवस आज
सांता लूसिया का जन्म दिवस आज
सांता लूसिया (Santa Lucia या Saint Lucy) तीसरी सदी (3rd century) की एक ईसाई युवती थीं, जिनका जन्म सिसिली (इटली) के सिराक्यूज़ शहर में हुआ था।
उन्हें ईसाई धर्म में “प्रकाश की देवी” (Bearer of Light) भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपना जीवन गरीबों और ज़रूरतमंदों की सेवा में समर्पित किया।
उनका जन्म 283 ईस्वी के आसपास माना जाता है और वे 304 ईस्वी में शहीद हो गईं।
उनके जीवन की मुख्य बातें
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1. गरीबों की मदद
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सांता लूसिया अंधेरे में गरीबों तक भोजन पहुँचाने के लिए सिर पर मोमबत्तियों का ताज पहनती थीं ताकि दोनों हाथों से भोजन और आवश्यक वस्तुएँ दे सकें।
इस कारण उन्हें “Light Bringer” कहा गया।
2. धार्मिक निष्ठा
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उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी भगवान यीशु के प्रति समर्पित रखी और विवाह न करने का संकल्प लिया।
3. शहादत
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रोमन शासन के समय ईसाइयों पर अत्याचार हो रहे थे।
सांता लूसिया ने अपने धर्म को न छोड़ने का निर्णय लिया, जिसकी वजह से 304 ईस्वी में उन्हें शहीद कर दिया गया।
इतिहास में सांता लूसिया दिवस का महत्व
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1. प्रकाश और आशा का प्रतीक
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13 दिसंबर को साल की सबसे लंबी रात माना जाता था (पुराने कैलेंडर के अनुसार)।
इसलिए सांता लूसिया का दिन—अंधकार में प्रकाश की आशा—का प्रतीक बन गया।
2. स्कैंडिनेवियन देशों में मुख्य त्योहार
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स्वीडन, नॉर्वे और डेनमार्क में यह त्योहार बहुत प्रसिद्ध है।
यहाँ लड़कियाँ सफेद कपड़े पहनकर, सिर पर जलती हुई मोमबत्तियों का मुकुट लगाकर जुलूस निकालती हैं—जो सांता लूसिया का प्रतीक है।
3. अच्छाई और सेवा का संदेश
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यह दिवस सिखाता है कि—
अंधेरे में भी प्रकाश फैलाओ
गरीबों और ज़रूरतमंदों की मदद करो
साहस और विश्वास बनाए रखो
4. ईसाई परंपरा में महत्वपूर्ण संत
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सांता लूसिया को अंधों की संरक्षक संत (Patron Saint of the Blind) भी माना जाता है, क्योंकि कथा के अनुसार उन्होंने अपनी आँखें बलिदान के रूप में भगवान को अर्पित कर दीं।
सांता लूसिया दिवस पर क्या होता है?
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मोमबत्ती का मुकुट पहनकर समारोह।
गीत “Santa Lucia” गाया जाता है।
गरीबों को भोजन बाँटा जाता है।
घरों और चर्चों में रोशनी की सजावट।
सेवा कार्य और दान।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
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