यहाँ नहीं होती हनुमान जी की पूजा: उत्तराखंड का रहस्यमयी द्रोणागिरि गांव
🚩 यहाँ नहीं होती हनुमान जी की पूजा: उत्तराखंड का रहस्यमयी द्रोणागिरि गांव
भारत में भगवान हनुमान जी की पूजा लगभग हर घर और मंदिर में श्रद्धा के साथ की जाती है। उन्हें संकटमोचन, भक्तवत्सल और शक्ति के प्रतीक देवता माना जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में ही एक ऐसा स्थान भी मौजूद है, जहाँ आज तक हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती?
यह अनोखी परंपरा उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित द्रोणागिरि गांव से जुड़ी हुई है।
🏔️ कहाँ स्थित है द्रोणागिरि गांव?
द्रोणागिरि गांव उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र में, जोशीमठ-नीति मार्ग पर लगभग 14,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक प्राचीन हिमालयी गांव है। यहाँ के स्थानीय निवासियों की मान्यता सदियों पुरानी धार्मिक कथा से जुड़ी हुई है।
🌿 क्यों नहीं होती यहाँ हनुमान जी की पूजा?
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस पर्वत को हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए उठाकर ले गए थे, वह पर्वत द्रोणागिरि क्षेत्र में ही स्थित था।
गांव के लोग उस पर्वत को अपना आराध्य देव मानकर पूजा करते थे। जब हनुमान जी औषधि पहचान न पाने के कारण पर्वत का एक भाग ही उठा ले गए, तो ग्रामीणों को यह घटना अपमानजनक लगी।
इसी कारण आज भी:
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गांव में हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती
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लाल झंडा लगाने से परहेज किया जाता है
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पर्वत देवता की विशेष पूजा परंपरा निभाई जाती है
👵 वृद्ध महिला और सामाजिक मान्यता
लोककथाओं के अनुसार, जब हनुमान जी संजीवनी बूटी की खोज में भ्रमित हुए, तब गांव की एक वृद्ध महिला ने उन्हें सही पर्वत की दिशा बताई।
मान्यता है कि बाद में उस महिला का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। आज भी कुछ धार्मिक अनुष्ठानों में महिलाओं की सीमित भागीदारी इसी परंपरा से जुड़ी मानी जाती है।
📖 शास्त्रों में क्या मिलता है उल्लेख?
हनुमान जी द्वारा संजीवनी पर्वत उठाने की कथा दो प्रमुख ग्रंथों में मिलती है:
📜 1. वाल्मीकि रामायण के अनुसार
मेघनाद के ब्रह्मास्त्र से घायल श्रीराम, लक्ष्मण और वानर सेना को बचाने के लिए जामवंत ने हनुमान जी को हिमालय से चार दिव्य औषधियाँ लाने भेजा।
औषधि पहचान न पाने पर हनुमान जी पूरा पर्वत ही उठा लाए और बाद में उसे पुनः यथास्थान स्थापित कर दिया।
📜 2. रामचरितमानस के अनुसार
लक्ष्मण के मूर्छित होने पर वैद्य सुषेण के निर्देश पर हनुमान जी औषधि लेने गए। पहचान न होने के कारण उन्होंने पर्वत उठा लिया और उपचार के बाद पर्वत को वापस नहीं रखा।
⛰️ संजीवनी पर्वत से जुड़ी एक और मान्यता
कुछ मान्यताओं के अनुसार संजीवनी युक्त पर्वत का एक भाग आज श्रीलंका में स्थित एडम्स पीक (श्रीपद पर्वत) माना जाता है, जिसे स्थानीय लोग रहस्यमयी और पवित्र स्थल मानते हैं।
🌼 आस्था और परंपरा का अनोखा संगम
द्रोणागिरि गांव की यह परंपरा दर्शाती है कि भारत में धार्मिक आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं बल्कि स्थानीय इतिहास, लोकविश्वास और सांस्कृतिक भावनाओं से भी गहराई से जुड़ी होती है।
जहाँ पूरे देश में हनुमान जी संकटमोचक के रूप में पूजे जाते हैं, वहीं यह गांव अपनी विशिष्ट मान्यता के कारण धार्मिक विविधता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
