चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू: तिथियों के संयोग से 26 मार्च को ही अष्टमी और नवमी, जानें शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू: तिथियों के संयोग से 26 मार्च को ही अष्टमी और नवमी, जानें शुभ मुहूर्त
19 मार्च से शुरू होगा चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व
शक्ति उपासना का प्रमुख पर्व चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च से आरंभ होगा। इस बार तिथियों के विशेष संयोग के कारण अष्टमी और नवमी एक ही दिन यानी 26 मार्च को पड़ रही हैं, जिसके कारण नवरात्रि इस बार आठ दिनों की मानी जाएगी।
इसी दिन नव संवत 2083 का भी शुभारंभ होगा, जिसका नाम रौद्र संवत रहेगा।
मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान पालकी में
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान पालकी में होगा। शास्त्रों में इसे सुख-समृद्धि, कल्याण और शांति का संकेत माना जाता है।
नवरात्रि को लेकर मंदिरों और घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कई स्थानों पर मंदिरों की विशेष सजावट की जा रही है और भक्तजन पूजा-अर्चना की तैयारी में जुट गए हैं।
मंदिरों में होंगे विशेष पाठ और अनुष्ठान
नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ और विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। वहीं राम मंदिरों में रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण का नवाह्न पारायण भी आयोजित किया जाएगा।
इन दिनों में श्रद्धालु उपवास रखकर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं।
अष्टमी और नवमी की तिथि
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष तिथियों का संयोग कुछ इस प्रकार रहेगा:
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अष्टमी तिथि: 25 मार्च दोपहर 1:51 बजे से 26 मार्च सुबह 11:49 बजे तक
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नवमी तिथि: 25 मार्च सुबह 11:50 बजे से 27 मार्च सुबह 10:07 बजे तक
आमतौर पर किसी भी पर्व के लिए सूर्योदय की तिथि को मान्य माना जाता है। लेकिन भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को दोपहर 12 बजे हुआ था, इसलिए इसी आधार पर 26 मार्च को राम नवमी मनाई जाएगी।
इस दिन होगी महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा
26 मार्च को नवरात्रि के आठवें और नौवें स्वरूप — मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसी दिन कन्या पूजन और हवन का भी विशेष महत्व माना जाता है।
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि की शुरुआत घट स्थापना (कलश स्थापना) से होती है, जो अत्यंत शुभ मानी जाती है।
घट स्थापना के लिए शुभ समय इस प्रकार है:
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शुभ चौघड़िया: सुबह 6:54 से 8:06 बजे तक
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चर और लाभ चौघड़िया: सुबह 11:05 से दोपहर 1:30 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 से 12:58 बजे तक
धार्मिक विद्वानों के अनुसार अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
