Search for:

जीवित्पुत्रिका व्रत

जीवित्पुत्रिका व्रत आज

*******************
जीवित्पुत्रिका व्रत (जिसे जितिया या जीउतिया भी कहा जाता है) संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए रखा जाने वाला एक अत्यंत कठिन और पवित्र हिंदू व्रत है। यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में माताओं द्वारा पूरी श्रद्धा के साथ रखा जाता है।
यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है।
मुख्य बातें और महत्व
=============
कठिन उपवास: यह व्रत पूरे 36 घंटे का होता है। इसमें माताएं लगभग डेढ़ दिन तक निर्जला (बिना अन्न और जल के) उपवास रखती हैं।
जीमूतवाहन देव की पूजा: इस व्रत में मुख्य रूप से भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। मिट्टी या गाय के गोबर से चील और सियारिन की मूर्तियां बनाकर उनकी कथा सुनी जाती है।
संतान की रक्षा: मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान पर आने वाले सभी संकट दूर होते हैं और उन्हें दीर्घायु प्राप्त होती है।तीन दिनों का अनुष्ठानयह पर्व लगातार तीन दिनों तक चलता हैb
नहाय-खाय (पहला दिन): 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार, इस दिन माताएं सुबह स्नान करके पवित्र भोजन (सात्विक भोजन) ग्रहण करती हैं। इसके बाद अगले दिन के कठिन व्रत की शुरुआत होती है।
खुर जितिया / मुख्य व्रत (दूसरा दिन): 3 अक्टूबर 2026, शनिवार, यह मुख्य व्रत का दिन होता है, जिसमें माताएं पूरे दिन और रात निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को जीमूतवाहन भगवान की कथा सुनती हैं।
पारण (तीसरा दिन): 4 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह सूर्योदय (लगभग 6:15 बजे) के बाद। व्रत के आखिरी दिन सूर्योदय के बाद पूजा-पाठ करके व्रत का पारण किया जाता है (व्रत खोला जाता है), जिसके बाद माताएं अन्न-जल ग्रहण करती हैं।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9116089175

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required