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अगस्त के फूल

अगस्त के फूलों

इस पौधे का नाम महर्षि अगस्त्य के नाम पर आधारित है। यह भी उन्ही की तरह परोपकारी और जनकल्याण करने वाला पौधा है। इस पौधे की पत्तियां साग की तरह खाई जाती हैं। साथ कि इसके बड़े आकार के मांसल फूलो को भी साग भाजी के रूप में बहुत पसंद किया जाता है, किन्तु इसके फूलों के पकोड़े सर्वाधिक प्रचलन में हैं। जो स्वादिष्ट व्यंजन के साथ साथ औषधीय महत्व के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण हैं।
वैसे तो इसकी पत्तियों की साग आंखों के लिए अच्छी मानी जाती है, किन्तु इसकी पत्तियों को पानी मे उबालकर या रस निकालकर गुलाबजल के साथ मिलाकर आंखों में डालने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। साथ ही अर्धकपारी तथा सरदर्द जैसे रोगों में इसकी पत्तियों का 2- 4 बूंद रस नाक में डालने से काफी आराम मिलता है।
अगस्त के फूलों से बिना तेल वाले पकोड़े/ पातोड़े/ #फंगोरे भी बनाये जाते हैं। इसकी पत्तियों तथा फूलों के सेवन से त्वचा रोग, एलर्जी, विषाक्त प्रभाव आदि शरीर से दूर होते हैं। लंबी बीमारी भी जड़ से समाप्त होकर लौटकर नही आती है। चिंता तथा तनाव का तो यह पौधा शत्रु है। अगस्त में भरपूर मात्रा में आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, बी और सी आदि पाया जाता है।इसकी पत्तियों के रस को नाक में डालने से अधकपारी रोग छू मंतर हो जाता है। पत्तियों के साथ गर्म गुनगुने तेल को कान में डालने से कान के दर्द में भी राहत मिलती है। विटामिन A की प्रचुरता के कारण नेत्र रोगियों के लिये यह वरदान से कम नही है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह एक उत्तम शक्ति वर्धक औषधि भी है।
कहीं किसी घाव से रक्त स्त्राव रुक नही रहा है तो अगस्त के पत्ते घिसकर लगा दें, तुरंत रक्त स्त्राव बंद हो जायेगा। मिर्गी के रोगियों को भी इसके पत्ते काली मिर्च के साथ सूंघने की सलाह दी जाती है। ये तो हुयी इसके औषधीय गुणों की बात, चलिये अब इसके स्वादिष्ट व्यंजन वाले गुण की चर्चा भी कर लेते हैं।
सामग्री: अगस्त के ताजे फूल एवं कलियाँ, बेसन, मिर्च, हरा धनिया, काला नमक, सामान्य नमक और सामान्य मसाले जैसे जीरे, थोडा अजवाइन, सौंफ, हल्दी आदि।
विधि-
अगस्त/ अगस्ति फूल की मांसल पंखुड़ियों को छोटा छोटा काटकर, बेसन और बाकि सभी सामग्री मिलकर गूथ ले (पानी बहुत कम लगता है, क्योंकि पंखुड़ियों में काफी मात्रा में पानी रहता है), फिर इससे लड्डुओं की तरह गोल या अंडाकार बॉल्स बना लें। छन्नी के ऊपर रखकर भाप में पकायें।
1. ठंडा होने के बाद व्यंजन तैयार है। ऐसे सीधे ही खाया जाता है।
2. और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए बॉल्स के छोटे छोटे टुकड़े काटकर उसे तेल मसाले और कड़ी पत्ते के साथ फ्राय करें। गर्मागर्म नास्ता तैयार है।
इस व्यंजन के अलावा आप चाहें तो इसके फूलों की पंखुड़ियों को प्याज की तरह काटकर बेसन में लपेटकर इससे स्वादिष्ट पकोड़े भी बना सकते हैं। ये स्वाद और सेहद दोनो के लिए फायदेमंद होते हों।
फूलों से तैयार किया गया ड्राप आखों के लिये बेहद फायदेमंद होता है आखों की रोशनी (नज़र) को बढाता है।
हम हर वर्ष कुछ मात्रा में इसका ड्राप बनाते है जो आखों को शीतलता प्रदान करता है।

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