बंदाल का पौधा
ये बंदाल का पौधा है इसके फल पीलिया रोग में बहुत प्रभावी है!
ये हमारे उपवन में इस समय काफी होता है इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये शीतवीर्य वनस्पति है इसका विपाक कटु है!
कोमल प्रकृति वालो के लिए हानिकारक है।
ये लीवर सम्बंधित विकारों के लिए अमोघ वनस्पति है इसका स्वरस और कच्ची बबूल की फलियों का स्वरस दोनों को आपस में मिलाकर सन्धी बंधन संस्कार करके धरती में गाड़ते है और इसके उपर काले तिल बो देते है जब तिल के पौधे डेढ़ फीट के हो जाते है तब इसको जड़ समेत निकाल कर इसका भी स्वरस बंदाल वाले पात्र में डालकर उसमें थोड़ा गुड़ मिलाकर (बगैर मसाले) का 24 घंटे के लिए किसी कांच के पात्र में डालकर धूप में रखते है।
बस औषधि तैयार है।
गुण-धर्म
ये औषधि लौह तत्व से भरपूर है लीवर, नज़र की कमजोरी और बालों को काला करने करने के लिए अक्सीर औषधि है 40 वर्ष तक के लोगों के लिए ये सफेद बालों को काला कर देती है!
बहुत ही आसानी से तैयार होने वाली बेहद महत्वपूर्ण औषधि है।
आप सभी भी इसको बनाकर स्वास्थ्य लाभ उठायें!
कुछ लोग इसको कचरी भी कहते है लेकिन कचरी में फल बिल्कुल चिकने होते हैं और बंदाल में हल्के कंटीले!
