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स्त्री कोई वस्तु नहीं कि उसे दांव पर लगाया जाय

स्त्री कोई वस्तु नहीं कि उसे दांव पर लगाया जाय दुर्योधन ने उस अबला स्त्री को दिखा कर अपनी जंघा ठोकी थी, तो उसकी जंघा तोड़ी गयी। दु:शासन ने छाती ठोकी तो उसकी छाती फाड़ दी गयी। महारथी कर्ण ने एक असहाय स्त्री के अपमान का समर्थन किया, तो श्रीकृष्ण [...]

मित्र इतना दरिद्र कैसे?

मित्र इतना दरिद्र कैसे? नङ्गे पैर सुधबुध खोए तीनो लोको के स्वामी दौड़े चले जा रहे थे, पीछे पीछे रुक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिन्दा, सत्या, लक्ष्मणा और भद्रा भी पागल सी दौड़ रही है, ये कौन आ गया जिसके लिए भगवानों के भगवान दौड़ रहे है? मंत्री, सेनापति, द्वारपाल सब [...]

हनुमानजी का विवाह

हनुमानजी ने एक दिन उन्होंने सोचा की उनके भीतर बल तो बहुत है पर उस बल के सार्थक प्रयोग का ज्ञान भी आवश्यक है। बिना गुरु के ज्ञान नहीं हो सकता। अतः हनुमानजी ने गुरु की तलाश प्रारम्भ की। गुरु की खोज करते हुए उन्हें पता चला की भगवान सूर्य [...]

गरुड़-कथा

गरुड़-कथा विनतानन्दन गरुड़ जब अण्डा फोड़कर बाहर निकले, तब नवजात शिशु की अवस्था में ही उन्हें आहार ग्रहण करने की इच्छा हुई। वे भूख से व्याकुल होकर माता से बोले–’माँ! मुझे कुछ खाने को दो।’ पर्वत के समान शरीर वाले महाबली गरुड़ को देखकर परम सौभाग्यवती माता विनता के मनमें [...]

धन धन भाग तेरी मनिहारी

धन धन भाग तेरो मनिहारी  बरसाने में एक सेठजी रहते थे। उनके कई कारोबार थे, तीन बेटे तीन बहुएँ थी, सब के सब आज्ञाकारी थे, लेकिन सेठजी के बेटी नहीं थी, यही अभाव उन्हें खलता था। यह चिंता संतों के दर्शन से कम हुई। संत बोले मन में जो अभाव [...]

राम कथा

राम कथा जय श्री राम।। क्या कारण था?, जो कि, माता कैकई ने, राम जी को 14 वर्ष का वनवास दिया?। 14 वर्ष से कम, या अधिक का क्यों नहीं दिया?। राम वनवास यह स्वयं रामजी का संकल्प था। राम जी अपने वनवास काल में, अनेक उद्देश्यों को पूरा करना [...]