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छरीला: कई बीमारियों की प्राकृतिक काट

छरीला: कई बीमारियों की प्राकृतिक काट

क्या आप जानते हैं कि छरीला क्या है और इसका उपयोग किन रोगों में किया जाता है? आमतौर पर लोग छरीला का उपयोग केवल मसाले के रूप में करते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे एक बहुमूल्य औषधि माना गया है। बालों की समस्या, आंखों के रोग, सिर दर्द, मूत्र विकार, त्वचा रोग और सूजन जैसी अनेक समस्याओं में छरीला बेहद लाभकारी होता है।

आइए विस्तार से जानते हैं छरीला के फायदे, औषधीय गुण और उपयोग के तरीके


1. छरीला क्या है?

छरीला एक प्रकार की वनस्पति (Lichen) है, जो चट्टानों, पेड़ों की छाल और दीवारों पर जमती है। यह पथरीली पहाड़ियों पर फूल जैसी संरचना में उगती है, इसलिए इसे शिलापुष्प (Stone Flower) भी कहा जाता है।

  • ऊपरी भाग – श्यामला (गहरा रंग)

  • निचला भाग – सफेद

  • इसमें एक विशिष्ट सुगंध होती है


2. छरीला के अन्य नाम (Different Names of Chharila)

वानस्पतिक नाम: Parmelia perlata
कुल: Parmeliaceae

विभिन्न भाषाओं में नाम:

  • हिंदी: छरीला, पत्थरफूल, भूरिछरीला

  • संस्कृत: शैलेय, शिलापुष्प, अश्मपुष्प

  • English: Stone Flower, Yellow Lichen

  • उर्दू: हबाक्कारमनी, रीहानकरमनी

  • गुजराती: घबीलो, छडीलो

  • तमिल: कलपसी

  • मराठी: दगडफूल

  • पंजाबी: चालचालीरा

  • नेपाली: भन्याऊ

  • अरबी: अशिना, उसनाह

  • फारसी: दवाला, उशनह


3. छरीला के औषधीय गुण और फायदे

✅ 3.1 बालों की समस्या में छरीला के फायदे

छरीला असमय सफेद बालों की समस्या में लाभकारी है।
उपयोग: छरीला, कर्चूर, हल्दी, काली तुलसी, तगर और गुड़ – समान मात्रा में पीसकर लेप करें। इससे बालों का पकना कम होता है।


✅ 3.2 सिर दर्द में छरीला का लाभ

छरीला को पीसकर मस्तक पर लगाने से पुराना और बार-बार होने वाला सिर दर्द कम होता है।


✅ 3.3 आंखों के रोग में छरीला

छरीला चूर्ण को काजल की तरह लगाने से कफज नेत्र रोगों में लाभ मिलता है।
यह आंखों की सूजन और जलन में भी फायदेमंद है।


✅ 3.4 मूत्र रोग में छरीला के फायदे

  • छरीला का काढ़ा 10–30 ml मात्रा में

  • इसमें 1 ग्राम जीरा चूर्ण व 5–10 ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन करें
    → इससे पेशाब रुक-रुक कर आना, जलन और मूत्र विकार में लाभ होता है।


✅ 3.5 विसर्प रोग (त्वचा रोग) में छरीला

छरीला, रसांजन व मनःशिला का लेप करने से
घाव, फोड़े और विसर्प रोग में शीघ्र लाभ मिलता है।


✅ 3.6 घाव भरने में छरीला

छरीला का चूर्ण सीधे घाव पर लगाने से
✔ घाव जल्दी भरता है
✔ संक्रमण नहीं फैलता


✅ 3.7 कुष्ठ रोग में छरीला के फायदे

छरीला को मक्खन में मिलाकर त्वचा पर लगाने से कुष्ठ रोग में राहत मिलती है।


✅ 3.8 खुजली और त्वचा रोग में छरीला

छरीला का लेप करने से:

  • खुजली

  • पित्ती

  • त्वचा एलर्जी
    में तेजी से राहत मिलती है।


✅ 3.9 सूजन की समस्या में छरीला

छरीला को तेल में पकाकर मालिश करने या गुनगुना लेप लगाने से:

  • जोड़ों की सूजन

  • चोट की सूजन

  • शरीर की सूजन
    में खूब लाभ मिलता है।


4. छरीला के उपयोगी भाग

👉 पंचांग (पूरा पौधा औषधि हेतु उपयोगी होता है)
औषधि के लिए ताजा, सुगंधित और स्वच्छ छरीला ही प्रयोग करें।


5. छरीला का उपयोग कैसे करें?

  • काढ़ा: 10–30 ml

  • लेप: प्रभावित स्थान पर

  • चूर्ण: बाहरी प्रयोग हेतु

⚠️ अधिक लाभ के लिए छरीला का प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही करें।


6. छरीला कहां पाया जाता है?

छरीला मुख्य रूप से भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है:

  • उत्तराखंड

  • हिमाचल प्रदेश

  • जम्मू-कश्मीर

  • नीलगिरी की पहाड़ियां

यह पत्थरों और पुराने वृक्षों पर प्राकृतिक रूप से उगता है।


छरीला यानी पत्थरफूल एक बहुगुणी आयुर्वेदिक औषधि है, जो बालों, आंखों, त्वचा, मूत्र रोग, सूजन, घाव, खुजली और कुष्ठ जैसे गंभीर रोगों में भी लाभदायक सिद्ध होती है। सही मात्रा और सही विधि से प्रयोग करने पर यह प्राकृतिक औषधि चमत्कारी परिणाम देती है।

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