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महर्षि वागभट्ट जी का उपदेश: तेल का सही प्रयोग और उसके विष के समान प्रभाव

महर्षि वागभट्ट जी का उपदेश: तेल का सही प्रयोग और उसके विष के समान प्रभाव

महर्षि वागभट्ट जी कहते हैं कि तेल में भी विष जैसा प्रभाव हो सकता है यदि उसका प्रयोग विधिपूर्वक न किया जाए। जैसे मरे हुए और सोए हुए व्यक्ति, कर्जदार और दास, मूर्ख और लकड़ी में कोई फर्क नहीं होता, वैसे ही विष (जहर) और गलत प्रयोग किया हुआ तेल भी समान हैं। इसलिए तेल का सही मात्रा और विधि से प्रयोग अत्यंत आवश्यक है।

बार-बार गरम किए हुए तेल में पकौड़े आदि तलने से वह तेल विषैला बन जाता है, जो दिल की बीमारियां, गैस, एसिडिटी जैसे गंभीर रोग उत्पन्न कर सकता है। अतः तेल का सीमित मात्रा में और सही तरीके से उपयोग करना चाहिए।

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