चार सच्चे मित्र
🌸 चार सच्चे मित्र 🌸
किसी समय की बात है। एक बड़े से पेड़ पर लघुपतनक नाम का कौआ रहता था। उसी पेड़ के खोखले तने में हिरण्यक नाम का चूहा भी रहता था। पास की झील में मन्धारक नाम का कछुआ रहा करता था। ये तीनों आपस में गहरे मित्र थे।
एक दिन एक चित्रांग नामक हिरण वहाँ आया। वह घबराया हुआ था और बहुत तेज-तेज सांस ले रहा था। उसके दोस्तों ने पूछा तो पता चला कि वह शिकारी के फंदे से बचकर भागा है।
कौआ उड़कर पेड़ की फुनगी पर गया और देखा कि शिकारी दूसरी दिशा में जा चुका है। यह सुनकर हिरण ने चैन की सांस ली और इन मित्रों का साथी बन गया। अब वे रोज झील किनारे मिलकर बातें करने लगे।
🦌 हिरण का संकट
एक दिन चित्रांग मिलने नहीं आया। दोस्तों को चिंता हुई। कौआ उड़कर देखने गया तो पाया कि हिरण शिकारी के जाल में फँसा है।
सभी मित्र तुरंत वहाँ पहुँचे।
👉 चूहे ने अपने तेज दाँतों से जाल काट दिया और हिरण भाग निकला।
लेकिन उसी समय शिकारी आ गया। हिरण, चूहा और कौआ तो बच निकले, पर कछुआ धीमा था और शिकारी की पकड़ में आ गया।
🐢 कछुए को बचाने की योजना
तीनों मित्रों ने मिलकर योजना बनाई।
👉 हिरण ने झील के पास ऐसे लेटकर नाटक किया जैसे वह मर गया हो।
👉 कौआ उसकी देह पर बैठकर चोंच मारने लगा मानो आँखें निकाल रहा हो।
यह देखकर शिकारी ने कछुए को नीचे रख दिया और हिरण की ओर बढ़ा। तभी कछुआ तेजी से झील में कूद गया, हिरण भाग गया, चूहा भी दौड़ पड़ा और कौआ उड़ गया।
शिकारी खाली हाथ रह गया।
🌹 शिक्षा
सच्ची मित्रता हर मुसीबत से बचाती है।
जब मित्र साथ हों तो कोई भी कठिनाई बड़ी नहीं लगती।
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