गुरू प्रतिपदा आज
गुरू प्रतिपदा आज
गुरुप्रतिपदा माघ मास की कृष्ण प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है, खासकर महाराष्ट्र और दत्त संप्रदाय में, जिस दिन भगवान नृसिंह सरस्वती स्वामी महाराज ने गाणगापुर में अपनी ‘निर्गुण पादुका’ स्थापित कर ‘शैल्यगमन’ (अदृश्य) होकर अवतार कार्य पूर्ण किया था, जिसे भक्त अत्यंत श्रद्धा से मनाते हैं। यह तिथि गुरु-शिष्य परंपरा और गुरु की महिमा को समर्पित है, जो उनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन के महत्व को दर्शाती है।
गुरुप्रतिपदा का महत्व
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नृसिंह सरस्वती का अवतार: यह तिथि द्वितीय दत्तावतार श्री नृसिंह सरस्वती स्वामी महाराज के ‘निर्गुण पादुका’ स्थापना और उनके अदृश्य होने से जुड़ी है, जो गाणगापुर में हुई थी।
दत्त संप्रदाय में विशेष: यह पर्व दत्त संप्रदाय में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, और इसे एक शुभ व पुण्यदायी दिन माना जाता है।
गुरु महिमा: इस दिन गुरु के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त की जाती है, क्योंकि गुरु को ही मोक्ष का मार्ग माना जाता है।
शैल्यगमन: इस दिन स्वामी महाराज ने लौकिक रूप से अवतार समाप्त कर कर्दली वन में गुप्त हुए, इसलिए इसे शैल्यगमन तिथि भी कहते हैं।
कैसे मनाते हैं?
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भक्तजन गाणगापुर और औदुंबर जैसे स्थानों पर दर्शन करने जाते हैं।
श्री गुरुचरित्र का पाठ किया जाता है।
गुरु पादुकाओं की पूजा की जाती है और मन से प्रार्थना की जाती है।
गुरु के वचनों और शिक्षाओं का स्मरण किया जाता है।
गुरुप्रतिपदा नृसिंह सरस्वती स्वामी महाराज के महान कार्यों और गुरु की महिमा को याद करने का एक पवित्र दिन है।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
