खस का शरबत
खस का शरबत :
यह शरबत गर्मियों में, बहुत गुणकारी पेय है। इसके सेवन से , मुत्र में जलन, अपच, रक्तपित्त, शारीरिक एवं मानसिक थकावट दूर हो जाती है।
1- घटक द्रव्य और निर्माण ——-
खस का अर्क 250 ग्राम, पानी 1 किलो, चीनी 2. 500 ग्राम तथा निम्बू सत्व 15 रत्ती को मिलाकर, यथाविधि शरबत बना लें और ठंडा होने पर, कपड़े से छानकर, इसमें खाने वाला हरा रंग तरल एवं खस का ऐसंस आवश्यकता अनुसार मिला दें।
2- गुणकारी और उपयोगी ———
* यह शरबत भी अन्य शरबतों की तरह से स्वादिष्ट व समधुर होता है।
* यह शरबत मुत्र में होने वाली जलन, मुत्र का कम मात्रा में आना में लाभ देता है।
* यह शरबत मानसिक एवं शारीरिक थकावट को दूर करता है और मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है।
* ये शरबत प्यास को कम करके, तृप्ति तथा आनंदित करने वाला होता है।
* ये शरबत रक्तपित्त रोग ( मुंह, नाक, गुदा व योनि से रक्त जाने वाले रोग में लाभदायक होता है।
* ये शरबत पित्तज्वर रोग ( एक प्रकार का संक्रामक व तेजी से होने वाला रोग है। इसमें ज्वर, वमन, मंद नाड़ी, मूत्र में ऐल्वुमेन की उपस्थिति, रक्तस्राव तथा पीलिया के लक्षण होते हैं ) में लाभदायक है।
* ये शरबत पित्त विकार रोग ( एक कार्यात्मक पित्ताशय विकार है। यह आपके पित्ताशय की गतिशीलता को प्रभावित करता है – पित्त को आपके पित्त नलिकाओं में ले जाने की इसकी क्षमता। अधिक दुर्लभ रूप से, गतिशीलता विकार उस छोटी मांसपेशी (स्फिंक्टर) को प्रभावित करता है जहां स्थित आपकी पित्त नलिका आपकी आंत में खाली होती है।) में लाभ देता है।
* आंखों की लालिमा एवं जलन में भी , इस शरबत का
सेवन करना चाहिए।
* गर्मी के मौसम में, इसका ंसेवन नित्य करना चाहिए।
3- मात्रा और अनुपान ——-
अपनी रूचिनुसार, एक गिलास पानी में मिलाकर सेवन करें।
विशेष ——
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