भगवान शिव के प्रतीकों और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं
🔱 भगवान शिव के प्रतीकों और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं 🔱
भगवान शिव केवल संहार के देव नहीं हैं, बल्कि वे सम्पूर्ण सृष्टि के संतुलन, चेतना और अध्यात्म के प्रतीक हैं। उनके हर आभूषण, अस्त्र और प्रतीक का गहरा अर्थ और कथा है। आइये जानते हैं:
🌙 1️⃣ चन्द्रमा – मन का नियंत्रण
चन्द्रमा शिव के मस्तक पर शोभायमान है। यह मन का प्रतीक है — जो चंचल होता है। शिव इसे मस्तक पर रखकर सिखाते हैं कि मन को नियंत्रण में रखना चाहिए।
➡ कथा: दक्ष के श्राप से क्षय रोगी हुए चन्द्रमा ने शिव की तपस्या की। शिव ने उन्हें मस्तक पर स्थान दिया। यही सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा है।
🐍 2️⃣ नाग वासुकी – जागरूकता
शिव के गले का नाग वासुकी है, जो नागलोक का राजा है।
➡ कथा: समुद्र मंथन में रस्सी बने वासुकी शिव के अनन्य भक्त हैं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अपने गले में स्थान दिया — यह सावधानी और जागरूकता का प्रतीक है।
🔱 3️⃣ त्रिशूल – तीन गुण
त्रिशूल सत, रज और तम – तीन गुणों का प्रतीक है।
➡ कथा: सृष्टि के प्रारंभ में शिव के साथ ही ये तीन गुण प्रकट हुए। शिव ने इन्हें त्रिशूल रूप में धारण कर संतुलन बनाए रखा। त्रिशूल से शंखचूड़ और गणेश जी का सिर काटने की कथा प्रसिद्ध है।
🎵 4️⃣ डमरू – ध्वनि और सृष्टि
शिव के डमरू से ध्वनि और व्याकरण का जन्म हुआ।
➡ कथा: देवी सरस्वती की वीणा से ध्वनि प्रकट हुई, पर सुर-ताल शिव के डमरू से बने। शिव ने 14 बार डमरू बजाकर व्याकरण सूत्र दिए। डमरू सृष्टि में ध्वनि और लय का प्रतीक है।
👁️ 5️⃣ तीसरी आँख – विवेक
शिव की तीसरी आंख चेतना और दिव्य दृष्टि का प्रतीक है। इससे कामदेव का दहन हुआ — यानी कामना पर विजय और आत्मज्ञान का संदेश।
🐂 6️⃣ नंदी – धर्म और भक्ति
नंदी शिव के वाहन हैं और धर्म का प्रतीक हैं।
➡ कथा: ऋषि शिलाद ने शिव से अमर पुत्र मांगा — नंदी जन्मे। शिव के अंशस्वरूप नंदी शिव के गणों में प्रमुख हुए और वाहन बने।
☘️ 7️⃣ त्रिपुंड – वैराग्य
शिव के मस्तक पर भस्म की तीन रेखाएँ त्रिपुंड कहलाती हैं।
➡ कथा: सती के आत्मदाह के बाद शिव ने यज्ञकुंड की राख अपने माथे पर लगाई — यह त्रिपुंड आज भी वैराग्य और तीन लोकों का प्रतीक है।
🌊 8️⃣ गंगा – शुद्धि और जीवन
गंगा शिव की जटाओं में विराजती हैं।
➡ कथा: दुर्वासा ऋषि के शाप से गंगा को धरती पर आना पड़ा। राजा भगीरथ ने शिव से प्रार्थना की। गंगा के वेग को रोकने के लिए शिव ने अपनी जटाओं में उन्हें बाँधा।
🔱 शिव का संदेश
भोलेनाथ के प्रतीक केवल आभूषण नहीं हैं — ये जीवन, चेतना और सृष्टि के रहस्यों के प्रतीक हैं। इनका दर्शन हमें संयम, जागरूकता और संतुलन सिखाता है।
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