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मीन मलमास आज से होगा प्रारम्भ

मीन मलमास आज से होगा प्रारम्भ
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हिंदू पंचांग और ज्योतिष में सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे संक्रांति कहा जाता है। हर संक्रांति का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन मीन संक्रांति को विशेष माना जाता है, क्योंकि इसी समय से एक ऐसा काल शुरू होता है जिसमें कई मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मीन संक्रांति के बाद लगभग एक महीने तक विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते है।
मीन संक्रांति से क्यों बंद हो जाते हैं शुभ कार्य?
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ज्योतिष के अनुसार सूर्य को ऊर्जा, तेज और मांगलिक कार्यों का प्रमुख कारक माना जाता है, लेकिन जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो उनकी गति और प्रभाव धीमा जाता है। इसी वजह से इस अवधि को खरमास या मलमास कहा जाता है। इसके साथ ही धनु राशि भी गुरु की ही राशि है। यही कारण है कि साल में दो बार खरमास पड़ता है। पहली बार मीन राशि में और दूसरी बार धनु राशि में सूर्य के गोचर से खरमास लगता है। माना जाता है कि इस समय सूर्य की ऊर्जा कम प्रभावी होती है, इसलिए इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना या कोई बड़ा मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। हालांकि इस समय पूजा-पाठ, जप और दान जैसे धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।
क्या है इसकी पौराणिक कथा
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मीन संक्रांति और खरमास को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। मान्यता है कि सूर्य देव का रथ सात घोड़े खींचते हैं। लगातार यात्रा करने की वजह से जब ये घोड़े थक जाते हैं तो सूर्य देव उनके स्थान पर कुछ समय के लिए गधों को रथ में जोड़ देते हैं। गधों की गति घोड़ों की तुलना में धीमी मानी जाती है, इसलिए इस समय सूर्य की चाल भी मंद मानी जाती है। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहा जाता है। एक महीने बाद सूर्य देव के रथ में वापस घोड़े जुड़ जाते हैं।
कब खत्म होगा यह समय?
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मीन संक्रांति से शुरू होने वाला खरमास लगभग एक महीने तक चलता है। जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह अवधि समाप्त हो जाती है और उसके बाद फिर से विवाह और अन्य शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।
दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व
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धार्मिक दृष्टि से खरमास को अत्यंत पुण्यदायी समय माना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, यज्ञ, दान और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का फल कई गुना अधिक मिलता है। इसलिए लोग इस समय पूजा-पाठ, व्रत और सेवा कार्यों पर अधिक ध्यान देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और मीन लग्न को विवाह के लिए शुभ माना जाता है। वहीं अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, मघा, चित्रा, स्वाति, हस्त, अनुराधा और उत्तरा फाल्गुनी जैसे नक्षत्र विवाह संस्कार के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद

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