Search for:

नीम भारतीय मूल का वृक्ष है

नीम भारतीय मूल का वृक्ष है जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को एक वृक्ष नीम का अवश्य लगाना चाहिए।
आरोग्य दाता ये पादप हमारे संस्कृति की धरोहर हैं नीम जितना धार्मिक महत्व है उसके कही ज्यादा औषधि गुणों का महत्व है।
लेख को बहुत बड़ा ना करते हुए कुछ संक्षेप कुछ जानकारी से अवगत कराते रहें हैं जो हमारे अनुभव है वही सांझा कर रहा हूँ।
नीम को शीतला देवी का प्रतीक माना जाता है चैत माह में की इसकी कोमल पत्रों को चबाकर खाने का विधान बनाया है रक्त शुद्धि के साथ-साथ अनेकानेक गंदे बैक्टीरिया को खत्म करता है #नीम नीम के पत्रों की राख को पानी में घोलकर पिजिये गुर्दे की पथरी घुलकर निकल जाती है।
छाल घीसकर घाव पर लगाने से शीघ्र भरने लगता है।
फलों से तेल निकालते हैं जो एन्टी बैक्टीरियल गुणों वाला होता है #उपदंश में ये तेल 5-5 बूँद पानी में डालकर पीने से उपदंश के जीवाणु समाप्त हो जाते है।
जब #नीम का वृक्ष पुराना हो जाता है तब इसमे से एक तरल पदार्थ बहने लगता है जिसको #निम्ब नीरा मस्ती कहते हैं ये #नीर आखों के लिये बहुत ही शक्तिशाली #रसायन है।
2-2 बूँद आखों में डालने से आखों के सभी विकार निर्मूल होने लगते हैं अगर लगातार एक वर्ष तक डाला जाए #मोतियाबिंद भी समाप्त हो जाता है इसके नीर में तीक्ष्ण क्षारीय तत्व होता है जो नेत्रों को नवीन कर देता है।
मैं हर वर्ष चैत माह में #नीम का #नीर ढूंड कर सुरक्षित कर लेता हूँ और अपने चिकित्सीय कार्य हेतु!

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required