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प्रदोष व्रत आज

प्रदोष व्रत आज

प्रदोष व्रत को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस समय भगवान शिव अत्यंत उदार होते हैं और अपने भक्तों को अपार सुख प्रदान करते हैं। ऐसे में साल का अंतिम प्रदोष व्रत होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
प्रदोष व्रत की तिथि
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पंचांग के अनुसार पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 16 दिसंबर , मंगलवार रात 11 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर 18 दिसंबर, गुरुवार को रात 2 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि और प्रदोष काल की गणना के आधार पर साल का अंतिम प्रदोष व्रत 17 दिसंबर 2025, बुधवार को ही रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
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बुधवार के दिन पड़ने पर इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा। यह व्रत व्यापार और करियर में प्रगति दिलाने वाला माना जाता है। प्रदोष काल 17 दिसंबर 2025, बुधवार को शाम 5 बजकर 27 मिनट से रात 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। इस काल को भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक यानी प्रदोष काल में पूजा अत्यधिक फलदायी मानी जाती है।
प्रदोष व्रत की धार्मिक मान्यता
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले संकट और दोष धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेल पत्र, फूल और धूप-दीप अर्पित कर पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि लगातार 11 प्रदोष व्रत रखने से सभी कष्ट, पाप और दुख दूर होते हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विवाह की इच्छा रखने वाली कन्याओं को इस दिन माता पार्वती को लाल चुनरी अर्पित करनी चाहिए।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
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• प्रदोष व्रत के दिन स्नान कर साफ वस्त्र पहने।
• घर के मंदिर या शिवालय में बेलपत्र, गंगाजल, दही, दूध, शहद आदि से अभिषेक करें।
• शिवलिंग पर चंदन, अक्षत, फूल, धूप–दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
• शाम के समय स्नान कर या स्वच्छ होकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
• इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
• प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती पूजा और आरती करें।
• पूजा संपन्न होने पर भगवान को भोग लगाएं और प्रसाद खुद भी ग्रहण करें।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद

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