शीतला सप्तमी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र और व्रत कथा
शीतला सप्तमी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र और व्रत कथा
हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत माता शीतला को समर्पित होता है, जिन्हें रोगों का नाश करने वाली और स्वास्थ्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।
इस दिन श्रद्धालु माता शीतला की पूजा कर उन्हें शीतल (बासी) भोजन का भोग अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है, संतान की रक्षा होती है और रोगों से मुक्ति मिलती है।
शीतला सप्तमी 2026 – तिथि और मुहूर्त
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तिथि: चैत्र कृष्ण सप्तमी
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दिन: मंगलवार
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तिथि प्रारंभ: 9 मार्च 2026 प्रातः 6:08 बजे
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तिथि समाप्त: 10 मार्च 2026 प्रातः 7:45 बजे
🌼 पूजन का शुभ समय
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:30 से 5:30 बजे
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श्रेष्ठ पूजन समय: प्रातः 6:30 से 10:30 बजे तक
शीतला सप्तमी पूजन विधि
1️⃣ व्रत का संकल्प
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माता शीतला का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
संकल्प मंत्र:
मम सपरिवार सर्वरोग निवारणार्थं
संतान सुख समृद्धि प्राप्त्यर्थं
शीतला सप्तमी व्रतमहं करिष्ये॥
2️⃣ पूजा स्थान की तैयारी
यदि संभव हो तो शीतला माता के मंदिर में पूजा करें, अन्यथा घर के मंदिर या आंगन में माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पूजा सामग्री:
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कलश
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दीपक
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रोली
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अक्षत
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पुष्प
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जल
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नीम के पत्ते
👉 माता शीतला को नीम के पत्ते अवश्य अर्पित किए जाते हैं।
3️⃣ माता शीतला का ध्यान
वन्देऽहं शीतलां देवीं
रासभस्थां दिगम्बराम्।
मार्जनी कलशोपेतां
शूर्पालंकृत मस्तकाम्॥
अर्थ:
मैं उस माता शीतला को प्रणाम करता हूँ जो गधे पर विराजमान हैं, हाथ में झाड़ू, कलश और सूप धारण करती हैं तथा समस्त रोगों का नाश करती हैं।
4️⃣ पूजन सामग्री अर्पण
माता को क्रम से अर्पित करें:
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रोली
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अक्षत
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हल्दी
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पुष्प
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नीम के पत्ते
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धूप और दीप
5️⃣ भोग अर्पण
इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। माता को ठंडे या एक दिन पहले बने भोजन का भोग लगाया जाता है।
भोग में अर्पित करें:
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दही
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चावल
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पूरी
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गुड़
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मीठा भात
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बासी भोजन
इसे कई स्थानों पर “बसोड़ा” कहा जाता है।
6️⃣ शीतला माता मंत्र
ॐ शीतलायै नमः॥
या
ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः॥
👉 कम से कम 108 बार मंत्र जप करना शुभ माना जाता है।
7️⃣ माता की आरती
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता।
आदि शक्ति महिमा तेरी, जग में विख्याता॥
शीतला माता व्रत कथा
प्राचीन समय में एक नगर में एक राजा राज्य करता था। उस नगर में लोग श्रद्धा से शीतला सप्तमी का व्रत करते थे।
एक बार उस नगर की रानी ने इस व्रत को महत्व नहीं दिया और सप्तमी के दिन घर में गरम भोजन बनवा लिया। इससे माता शीतला अप्रसन्न हो गईं और रानी के पुत्र को भयंकर रोग हो गया।
दुखी होकर रानी ने ब्राह्मणों से उपाय पूछा। उन्होंने बताया कि आपने शीतला सप्तमी का अनादर किया है। यदि सच्चे मन से माता की पूजा करें और ठंडे भोजन का भोग लगाएं, तो माता प्रसन्न हो जाएंगी।
रानी ने पश्चाताप किया और विधि-विधान से माता शीतला की पूजा की। माता प्रसन्न हुईं और उसके पुत्र को रोग से मुक्त कर दिया। तभी से यह व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाने लगा।
शीतला सप्तमी का महत्व
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यह व्रत चेचक, बुखार और अन्य रोगों से रक्षा के लिए किया जाता है।
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माता शीतला को स्वास्थ्य और स्वच्छता की देवी माना जाता है।
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पूजा में नीम के पत्तों का प्रयोग रोगनाशक गुणों के कारण किया जाता है।
इस दिन क्या न करें
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घर में चूल्हा नहीं जलाना चाहिए
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ताजा या गरम भोजन नहीं बनाना चाहिए
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क्रोध और अपशब्दों से बचना चाहिए
धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियम से शीतला सप्तमी का व्रत करते हैं, उनके घर से रोग, क्लेश और विपत्ति दूर होती है तथा परिवार में सुख-शांति और स्वास्थ्य बना रहता है।
🕉️🙏
जय माँ भुवनेश्वरी
जय माँ शीतला देवी
