मानवता को दर्द से तड़पाती एक नई बीमारी “टेक्स्ट नेक”
मानवता को दर्द से तड़पाती एक नई बीमारी “टेक्स्ट नेक”
केस-1 भरत भूषण को गर्दन में हल्का-हल्का दर्द रहता था, लेकिन वह दर्द दिनों-दिन बढ़ता जा रहा था। आज सुबह जब वह सोकर उठा तो उसे चक्कर आ रहे थे, वह अपना संतुलन नहीं बना पा रहा था। जब वह जाँच के लिए आया तो पता चला कि उसकी गर्दन का कर्व गड़बड़ हो गया है जिससे ब्रेन-स्टेम में खिंचाव के कारण उसे चक्कर आ रहे थे।
केस-2 वंदना आर्या को रात में मोबाइल फोन से चैट करने की आदत थी। जब रात में वह मोबाइल फोन ऑफ़ करके सोने लगी तो उसके सिर और आँखों में तेज़ दर्द होने लगा। जाँच में पाया गया कि वंदना आर्या की सर्वाइकल डिस्क प्रोलेप्स हो गई है जिसके कारण उसे यह समस्या हुई।
केस-3 वेदांत दर्शन एक अव्वल विद्यार्थी है जो काफ़ी देर रात तक पढ़ाई करता है, साथ ही साथ कम्प्यूटर, लेपटॉप और मोबाइल फोन पर भी सक्रिय रहता है। हमेशा गर्दन झुकाने के कारण उसे गर्दन, पकंधे एव हाथों में तेज़ दर्द शुरू होने लगा। दर्द बढ़ता जा रहा था और परीक्षाएँ नज़दीक आ रही थी।
उपरोक्त तीनों केस आज से 15 साल पहले कभी-कभार ही देखने को मिलते थे लेकिन अब ऐसे मामले हम चिकित्सकों की प्रैक्टिस में रोज़ाना की बात हो गए हैं। अब रोज़ाना ही लगभग 4 से 5 युवा रोगी “टेक्स्ट नेक” नाम की एक आम हो रही बीमारी से पीड़ित होकर रोज़ाना मुझसे परामर्श लेने आते हैं। इक्कीसवीं सदी में मानवता के लिए उपहार बनकर आए गेजेट्स अब उसके लिए दुश्वारियाँ पैदा कर रहे हैं। ये गैजेट्स लोगों को दर्द के साथ-साथ तनाव भी दे रहे हैं। गैजेट्स की लत का इतना भयंकर प्रभाव पड़ रहा है। इसे लेकर ग्रीन स्टार फार्मा के डायरेक्टर डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि “टेक्स्ट नेक” बीमारी से स्पाइन 4 से.मी. तक झुक सकती है।
इस बीमारी को लेकर सबसे बड़ा ख़तरा युवाओं और बढ़ते बच्चों को है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल से उनकी सर्वाइकल स्पाइन यानी गर्दन की हड्डियों को स्थायी नुक़सान पहुँच सकता है। यही चिंता की सबसे बड़ी वजह है, क्योंकि इस कारण उन्हें अपना पूरा जीवन गर्दन दर्द के साथ बिताना पड़ सकता है। “टेक्स्ट नेक” यानी गर्दन, पीठ और कंधे की मांसपेशियों में अकड़न, दर्द और सुन्नपन एक वैश्विक बीमारी बन चुकी है।
एक शोध बताता है कि 18 से 44 साल तक की उम्र की लगभग 79 प्रतिशत जनसंख्या रोज़ाना जागी हुई अवस्था में, मात्र दो घंटे को छोड़कर, हर समय सेलफोन का किसी न किसी रूप में इस्तेमाल करती रहती है। इन तकनीकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से हमारे शरीर को काफ़ी हानि पहुँच रही है, लेकिन अगर हम इन गैजेट्स के इस्तेमाल को लेकर सतर्कता बरतें तो टेक्स्ट नेक की परेशानी से बच सकते हैं। हमारे कल के आर्टिकल्स में एक नज़र डालेंगे “टेक्स्ट नेक” के बारे में :
