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पति का राज, राख का मंजन : नीले ड्रम का रहस्य

नीला ड्रम – प्रथम अध्याय

गांव के छोर पर स्थित एक सुनसान घर अक्सर लोगों की नजरों में अजीब लगता था। वहां रहने वाली मंजरी की आंखों में एक अनकही व्यथा और रहस्यमयी चमक थी। उसके पति देवेन का कड़क स्वभाव पूरे गांव में जाना जाता था, परंतु एक तूफानी रात ने सब कुछ बदल दिया।

मौत और नीला ड्रम
बारिश की गरज में देवेन का शरीर मंजरी के सामने बेसुध होकर गिरा और अपराध की धड़कन उसके सीने में दौड़ पड़ी। उसने नीले ड्रम को खोला और पति की मौत को बंद कर दिया। वह ड्रम अब केवल धातु का पिंड नहीं, बल्कि मंजरी के रहस्य और भय का कैदखाना बन गया।

गंध और रहस्य
समय के साथ ड्रम से उठती गंध मंजरी को डरा भी रही थी और पागल भी बना रही थी। अपराध छिपाने का एकमात्र रास्ता उसे सूझा—शरीर को राख बना दो ताकि कोई सबूत न रहे। लेकिन उसने केवल इतनी ही बात नहीं सोची थी…

पागलपन की चरम सीमा
सुबह-सुबह जब गांव वाले देवी के मंदिर में शंख-घंटे बजाते, मंजरी अपने घर में राख निकाल कर मंजन करती। उसकी मुस्कान भयानक थी, जैसे वह सोचती हो—अब देवेन हमेशा उसके भीतर ही है।

डरावनी दास्तान
गांव के लोग कहते हैं कि हर तूफानी रात, नीले ड्रम से किसी के खटखटाने की आवाज आती है। हवा में राख की गंध और धीमी फुसफुसाहट फैल जाती है—मानो कोई अब भी मंजरी से हिसाब मांग रहा हो।

👉 यह केवल एक काल्पनिक कहानी है, जिसका वास्तविक जीवन या किसी व्यक्ति/स्थान से कोई संबंध नहीं है।

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