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वैदिक ज्योतिष में चन्द्रमा — मन, माता और भाग्य का स्वामी

🌕 वैदिक ज्योतिष में चन्द्रमा — मन, माता और भाग्य का स्वामी

वैदिक ज्योतिष में यदि कोई ग्रह कुंडली की आत्मा माना जाता है तो वह चन्द्रमा है।

क्योंकि:

✅ जन्म नक्षत्र चन्द्र से तय होता है
✅ दशा प्रणाली चन्द्र से चलती है
✅ विवाह गुण-मिलान चन्द्र से होता है
✅ दैनिक राशिफल चन्द्र राशि से बनता है

👉 इसलिए कहा जाता है:
“सूर्य आत्मा है, चन्द्र मन है — और मन ही जीवन चलाता है।”


🧠 चन्द्रमा क्या दर्शाता है?

क्षेत्र प्रभाव
🧒 माता भावनात्मक सुरक्षा
💭 मन विचार, डर, सुख-दुख
🌊 जल तत्व स्वास्थ्य व द्रव
🎨 कला रचनात्मकता
🙏 भक्ति आध्यात्मिक झुकाव
🏠 सुख आराम, संपत्ति

📈 मजबूत चन्द्रमा हो तो व्यक्ति:

✔ शांत, दयालु, लोकप्रिय
✔ भावनात्मक रूप से समझदार
✔ जीवन में सहज सुख पाने वाला
✔ कला व अध्यात्म में उन्नत

उच्च चन्द्र – वृषभ में
स्वगृही चन्द्र – कर्क में

ये दोनों स्थिति अत्यंत शुभ मानी जाती हैं।


📉 कमजोर या पीड़ित चन्द्रमा हो तो:

❌ चिंता, अनिद्रा
❌ अवसाद, भय
❌ रिश्तों में अस्थिरता
❌ स्वास्थ्य में कफ/मानसिक रोग

विशेषतः राहु-केतु से ग्रसित चन्द्र मानसिक संघर्ष बढ़ाता है


🔭 चन्द्रमा की सप्तम दृष्टि (पूर्ण दृष्टि) के सरल फल

(चन्द्र जहाँ बैठा है उसके ठीक सामने जिस भाव पर देखे)

🌱 शुभ स्थानों पर:

➡ 4th, 5th, 9th, 11th
= सुख, बुद्धि, भाग्य, धन वृद्धि

⚠ कठिन स्थानों पर:

➡ 6th, 8th, 12th
= रोग, चिंता, हानि, मानसिक कष्ट


✨ एक लाइन में भाव फल सार:

• लग्न पर – भावुक लेकिन यात्राप्रिय
• द्वितीय – धन आता-जाता
• तृतीय – साहसी धार्मिक
• चतुर्थ – भूमि, वाहन सुख
• पंचम – बुद्धि व संतान योग
• षष्ठ – रोग व तनाव
• सप्तम – सुंदर जीवनसाथी
• अष्टम – संकट योग
• नवम – भाग्य प्रबल
• दशम – कर्म में उतार-चढ़ाव
• एकादश – लाभ व मित्र
• द्वादश – खर्च व चिंता


वैदिक सत्य

👉 मजबूत चन्द्र = सुखी जीवन
👉 कमजोर चन्द्र = बेचैन जीवन

इसलिए ऋषियों ने कहा:

“कुंडली का पहला उपचार — चन्द्र को शांत करना।”

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