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वरद चतुर्थी व्रत आज 

वरद चतुर्थी व्रत आज

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प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। इस

शुभ अवसर पर भगवान गणेश की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही भगवान गणेश के निमित्त चतुर्थी का व्रत रखते हैं। इस व्रत को करने से साधक के आय और सौभाग्य में वृद्धि होती है और सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। साधक हर महीने चतुर्थी तिथि पर भक्ति भाव से भगवान गणेश की पूजा करते हैं। इसके साथ ही चतुर्थी तिथि पर दान-पुण्य भी किया जाता है।
विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त
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वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 27 जुलाई को देर रात 10 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 28 जुलाई को देर रात 11 बजकर 24 मिनट पर चतुर्थी तिथि समाप्त होगी। तिथि गणना से 28 जुलाई को विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी।
विनायक चतुर्थी शुभ योग
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ज्योतिषियों की मानें तो सावन माह की विनायक चतुर्थी पर दुर्लभ परिघ योग का संयोग बन रहा है। हर्षण योग का संयोग रात भर है। साथ ही रवि योग का भी संयोग है। रवि योग सुबह 05 बजकर 40 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 35 मिनट तक है। इन योग में स्नान-ध्यान कर भगवान गणेश की पूजा करने से आरोग्य जीवन का वरदान मिलेगा। साथ ही सभी प्रकार के शुभ कामों में सफलता मिलेगी।
क्यों मनाते हैं विनायक चतुर्थी?
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हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, विवाह या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत से पहले श्री गणेश की पूजा की जाती है ताकि कार्य निर्विघ्न रूप से सम्पन्न हो सके। हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है, जो विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित होती है।
विनायक चतुर्थी का महत्व
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मान्यता है कि विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को ज्ञान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही उनकी आराधना करने से जीवन में आ रहे तमाम कष्टों से मुक्ति भी मिलती है। कहा जाता है कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं, इनकी उपासना से किसी भी कार्य में आ रही रुकावट दूर हो जाती हैं। इतना ही नहीं विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश की भक्ति करने से व्यापार में भी बरकत होती है। इसलिए हमारे शास्त्र में विनायक चतुर्थी की महिमा का बेहद महत्व है।
विनायक चतुर्थी की पूजा विधि
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भगवान गणेश की सच्चे मन से आराधना करने से सभी परेशानियों का निवारण होता है और ईश्वर का आर्शीवाद प्राप्त होता है।
यह व्रत भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस दिन मध्याह्न के समय में श्री गणेश का पूजन करने से सुख-समृद्धि, धन-वैभव, ऐश्वर्य और संपन्नता मिलती है।
विनायक चतुर्थी के शुभ दिन पर प्रातः काल स्नानादि करके लाल या पीले वस्त्र पहन लें।
अब पूजा स्थल पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें। उसके बाद उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं। अब उन्हें दूर्वा, फल, फूल उनकी चरणों में अर्पित करें।
इसके बाद उन्हें लड्डूओं का भोग लगाएं। फिर दीपक जलाकर भगवान गणेश की आरती करें।
इसके बाद गणेश जी के मंत्रों का जाप करें।
अंत में भगवान गणेश को प्रणाम कर प्रसाद वितरण करें और पूरे दिन फलाहारी व्रत रखकर अगले दिन पंचमी तिथि में व्रत का पारण करें।
विनायक चतुर्थी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान
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विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करने की मनाही होती है। मान्यताओं के अनुसार, विनायक चतुर्थी को चंद्र दर्शन करने से जीवन में कलंक लगता है। इसलिए इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचें।
इसके अलावा तुलसी का प्रयोग गणेश जी की पूजा में नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से भक्त गणेश जी के क्रोध के भागी बन सकते हैं।
वहीं विनायक चतुर्थी के दिन जब गणेश जी की स्थापना घर पर करें तब उनको अकेला न छोड़ें, घर पर कोई न कोई अवश्य होना चाहिए।
वहीं गणेश जी की स्थापना करते वक्त ध्यान रखें कि उनकी पीठ का दर्शन न हो। पीठ का दर्शन करने से दरिद्रता आती है।
ध्यान रहें कि गणेश जी की पूजा में जब आप कोई दीपक जलाते हैं, तो उस दीपक के स्थान को बार-बार न बदलें और न ही उस दीपक को गणेश जी के सिंहासन पर रखें।
साथ ही विनायक चतुर्थी व्रत के दिन इस बात का विशेष ख्याल रखें कि फलाहार में नमक का सेवन न करें। विनायक चतुर्थी के दिन काले वस्त्र ना पहने क्योंकि काले रंग को नकारात्मकता का प्रतीक मानते हैं।
इतना ही नहीं इस दिन अगर भक्त व्रत रख रहे हैं तो किसी के भी लिए भी अपशब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का पुण्य नहीं मिलता है।
वैसे तो कभी भी बड़ों का अपमान नहीं करना चाहिए, लेकिन विनायक चतुर्थी के दिन खासतौर पर इस बात का ध्यान रखें, वरना पूजा का फल नहीं मिलेगा। और विनायक चतुर्थी पर किसी से कोई झगड़ा या मारपीट न करें।
विनायक चतुर्थी पर करें ये उपाय, दूर होंगे सभी कष्ट
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गणेश जी को दूर्वा बहुत प्रिय है। इसलिए दूर्वा अर्पित करें।
गणेश स्तोत्र का पाठ करने से मन शांत होता है और बुद्धि बढ़ती है।
लाल रंग गणेश जी को प्रिय है। इसलिए लाल पुष्प अर्पित करें।
‘ॐ गं गणपतये नम:’ मंत्र का जाप करें।
विनायक चतुर्थी का व्रत रखने और गणेश चालीसा का पाठ करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद

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