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Medical and scientific information
सफेद दाग (विटिलिगो) के उपचार और जागरूकता के क्षेत्र में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। निम्नलिखित संस्थाएँ और घटनाएँ इस दिशा में उल्लेखनीय हैं:
1. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
उपलब्धि: DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हेमंत कुमार पांडे ने हिमालयी जड़ी-बूटियों, विशेष रूप से विषनाग, से ‘ल्यूकोस्किन’ नामक दवा विकसित की है। यह दवा सफेद दाग के उपचार में प्रभावी पाई गई है और अब तक डेढ़ लाख से अधिक लोगों का इससे उपचार किया जा चुका है।
2. अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज
उपलब्धि: मार्च 2024 में, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभाग ने ‘स्मैश ग्राफ्टिंग’ तकनीक का उपयोग करके सफेद दाग के सफल ऑपरेशन किए हैं। इस प्रक्रिया में मरीज की स्वयं की मेलानोसाइट्स को ट्रांसप्लांट किया जाता है, जिससे प्रभावित क्षेत्र में रंग वापस लाने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष: उपरोक्त संस्थाएँ और घटनाएँ सफेद दाग के उपचार और जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इन प्रयासों से न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में प्रगति हो रही है, बल्कि समाज में इस स्थिति के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता भी बढ़ रही है।
3. जोधपुर तकनीक
उपलब्धि: जोधपुर के डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभागाध्यक्ष, डॉ. दिलीप कच्छावा ने एक विशेष सर्जिकल पद्धति विकसित की है, जिसे ‘जोधपुर तकनीक’ के नाम से जाना जाता है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए प्रभावी है, जिन पर दवाओं का असर नहीं होता। इसमें शरीर के स्वस्थ त्वचा के कुछ हिस्सों को सफेद दाग वाले क्षेत्रों में प्रत्यारोपित किया जाता है, जिससे दाग समाप्त हो जाते हैं। यह सरल और सस्ती तकनीक अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुकी है।