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महादेव को केतकी का फूल क्यों नहीं चढ़ाया जाता?

🌺 महादेव को केतकी का फूल क्यों नहीं चढ़ाया जाता?

भगवान शिव को बिल्व पत्र, आक, धतूरा तो चढ़ाया जाता है, लेकिन केतकी का फूल चढ़ाना वर्जित है। इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा है जो ब्रह्मा जी, विष्णु जी और शिव जी से जुड़ी है।


📜 पौराणिक कथा

एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में यह विवाद हो गया कि कौन सबसे बड़ा है।
तब भगवान शिव ने उन्हें सच्चाई दिखाने के लिए एक अनंत अग्नि स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) का रूप धारण किया और कहा —
“जो इस ज्योति का आदि या अंत खोज लेगा, वही सबसे बड़ा होगा।”

🔸 विष्णु जी वराह रूप में पाताल में गए — अंत (पैर) खोजने।
🔸 ब्रह्मा जी हंस रूप में ऊपर उड़े — सिर खोजने।

बहुत ऊँचाई पर ब्रह्मा जी को केतकी का फूल गिरा मिला।
उन्होंने उस फूल से झूठ बोलने को कहा — “तुम कह दो कि मैंने शिवलिंग का सिर देख लिया है।”

केतकी फूल ने झूठी गवाही दी।
जब ब्रह्मा जी नीचे लौटे तो उन्होंने विष्णु जी से कहा —
“मैंने शिवलिंग का सिर देख लिया है, गवाह यह केतकी फूल है।”

भगवान शिव प्रकट हुए — उन्होंने ब्रह्मा जी के झूठ से क्रोधित होकर कहा —
🔸 ब्रह्मा जी की पृथ्वी पर पूजा वर्जित होगी।
🔸 केतकी के फूल को भी श्राप दिया — तुम्हें मेरी पूजा में कभी स्थान नहीं मिलेगा।

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