पित्ताशय पथरी में दर्द
पित्ताशय पथरी में दर्द (Gallstone Colic) के आयुर्वेदिक उपचार
पित्ताशय पथरी और दर्द की स्थिति
पित्त की थैली (Gallbladder) में पथरी होने पर अचानक दर्द उठ सकता है। यह दर्द आमतौर पर दाईं पसली के नीचे होता है और पीठ या कंधे तक फैल सकता है। भोजन के बाद दर्द अधिक होता है। आयुर्वेद में इस स्थिति को शूल कहा गया है, और इसके लिए कई प्राकृतिक, सुरक्षित और बच्चों हेतु उपयुक्त उपाय बताए गए हैं।
दर्द की स्थिति में प्रथम उपचार लक्ष्य
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पित्त का तेज स्राव शांत करना।
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यकृत और पित्ताशय पर दबाव कम करना।
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दर्दनाशक व शूलहर औषधियों का प्रयोग।
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वमन, अपच और पसीने जैसी स्थितियों में सहायक औषधियाँ देना।
बच्चों (11 वर्ष) हेतु सुरक्षित आयुर्वेदिक उपचार
1. शूलवरजिनी वटी
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मात्रा: 1 गोली, गुनगुने पानी के साथ, दिन में 2 बार।
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लाभ: तीव्र दर्द, पेट की ऐंठन और पित्तजन्य उदर पीड़ा में शीघ्र आराम।
2. अजमोदा-अर्जुनादि काढ़ा / सौंफ-पिप्पली क्वाथ
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मात्रा: 20 ml काढ़ा + 20 ml गर्म पानी, भोजन के बाद, दिन में 2 बार।
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लाभ: आँतों की ऐंठन और पाचन विकार को शांत करता है।
3. हींग-अजवाइन उदर मालिश तैल
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विधि: 2 चम्मच तिल तेल गरम करें, उसमें 1 चुटकी हींग और ½ चम्मच अजवाइन डालें। थोड़ा ठंडा कर नाभि और दाईं पसली के आसपास मालिश करें।
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लाभ: पित्त का प्रवाह सहज करता है, शूल कम करता है।
4. गर्म पानी की बोतल से सिंकाई
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विधि: 5–10 मिनट तक दाएं ऊपरी पेट पर।
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लाभ: स्नायु शिथिलता और त्वरित शांति।
5. सहायक उपाय
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नींबू रस + शहद (1:1) सुबह-शाम 1 चम्मच — पित्त को शांत करता है।
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त्रिफला क्वाथ (20 ml, गुनगुना, रात में) — मल को शिथिल कर दबाव कम करता है।
दर्द में वर्जित बातें
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पूर्ण उपवास न करें (हल्का भोजन आवश्यक)।
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फ्रिज का पानी, ठंडी छाछ, तले-भुने पदार्थ न लें।
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घबराहट या अचानक लेटने से बचें।
कब लें चिकित्सकीय सलाह?
यदि दर्द बार-बार हो रहा हो, या बढ़ता जा रहा हो, तो तुरंत अल्ट्रासाउंड जांच कराएं। संभव है कि पथरी पित्त नली में अटक गई हो। ऐसे में वसा युक्त भोजन बिल्कुल न दें, वरना दर्द और बढ़ सकता है।
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