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अबूझ मुहूर्त का पाखण्ड: क्या हर पर्व सच में शुभ होता है?

अबूझ मुहूर्त का पाखण्ड: क्या हर पर्व सच में शुभ होता है?

आज के समय में एक नई प्रवृत्ति तेजी से देखने को मिल रही है—लोग विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत जैसे महत्वपूर्ण संस्कारों के लिए ज्योतिषीय मुहूर्त निकलवाने के बजाय कुछ खास पर्वों को ही “अबूझ मुहूर्त” मानकर उसी दिन कार्य सम्पन्न कर लेते हैं।
लेकिन क्या यह परंपरा वास्तव में शास्त्रसम्मत है? या फिर यह केवल सुविधा और भीड़ के कारण बना एक भ्रम है?


मुहूर्त शास्त्र: एक वैज्ञानिक और सूक्ष्म प्रणाली

मुहूर्त शास्त्र कोई साधारण गणना नहीं, बल्कि अत्यंत सूक्ष्म और वैज्ञानिक प्रणाली है। इसमें निम्न तत्वों का गहन विश्लेषण किया जाता है:

  • तिथि
  • वार
  • नक्षत्र
  • योग
  • करण
  • ग्रहों की स्थिति
  • लग्न

इन सभी कारकों के आधार पर ही किसी कार्य के लिए उपयुक्त समय निर्धारित किया जाता है।
यदि इन सिद्धांतों की अनदेखी करके केवल किसी पर्व को ही स्वतः शुभ मान लिया जाए, तो यह मुहूर्त शास्त्र की मूल भावना के विपरीत है।


किन पर्वों को गलत तरीके से “अबूझ मुहूर्त” माना जा रहा है?

1. चैत्र नवरात्रि

बहुत से लोग मानते हैं कि इस समय सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
लेकिन इस अवधि में प्रायः सूर्य मीन राशि में रहते हैं, जिसे खरमास कहा जाता है। शास्त्रों में इस काल में विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित बताए गए हैं।


2. गणेश चतुर्थी

यह भगवान गणेश की उपासना का अत्यंत पवित्र पर्व है।
परंतु ज्योतिषीय दृष्टि से चतुर्थी तिथि “रिक्ता तिथि” मानी जाती है, जो मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं होती।


3. रामनवमी

भगवान श्रीराम के जन्म का यह महापर्व अत्यंत पवित्र है।
किन्तु नवमी तिथि भी रिक्ता तिथि मानी जाती है, इसलिए विवाह या गृहप्रवेश जैसे कार्यों के लिए इसे सामान्यतः अनुकूल नहीं माना जाता।


4. महाशिवरात्रि

यह शिवभक्तों के लिए महान साधना और उपासना का पर्व है।
लेकिन यह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है, जो अधिकांश मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती।


5. विजयादशमी

दशहरा विजय और शुभारंभ का प्रतीक है।
इस दिन शस्त्र पूजन, शिक्षा आरंभ या नया कार्य शुरू करना श्रेष्ठ माना गया है।
लेकिन चातुर्मास के कारण कई परंपराओं में विवाह जैसे संस्कार इस समय वर्जित माने जाते हैं।


6. दीपावली

दीपावली लक्ष्मी पूजन और आध्यात्मिक उत्सव का महान पर्व है।
किन्तु यह अमावस्या तिथि को आता है, जो सामान्यतः मांगलिक संस्कारों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती।


पर्वों का वास्तविक उद्देश्य क्या है?

अधिकांश व्रत और त्योहारों का मुख्य उद्देश्य है:

  • भगवान का स्मरण
  • उपासना और साधना
  • आत्मिक शुद्धि

इनका उद्देश्य विवाह या अन्य सांसारिक कार्यों का आयोजन नहीं है।


 सुविधा नहीं, शास्त्र का पालन करें

यदि केवल सुविधा, भीड़ या सामाजिक दबाव के कारण पर्वों को “अबूझ मुहूर्त” घोषित किया जाता है, तो यह शास्त्रीय परंपरा को कमजोर करता है।

👉 इसलिए आवश्यक है कि:

  • हर मांगलिक कार्य से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लिया जाए
  • शास्त्रसम्मत मुहूर्त का ही चयन किया जाए

तभी कार्य का पूर्ण शुभ फल प्राप्त हो सकता है।

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