Search for:

अपरा एकादशी व्रत आज

अपरा एकादशी व्रत आज
*******************
ज्येष्ठ मास में आने वाली पहली एकादशी का नाम अपरा एकादशी है। ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम अपरा एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जो व्यक्ति एकादशी का व्रत पूरे विधि विधान के साथ करता है। उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। साथ ही घर परिवार में भी सुख समृद्धि बनी रहती है।
अपरा एकादशी कब है ?
=====================
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी का आरंभ 12 मई को दोपहर में 2 बजकर 53 मिनट पर आरंभ होगी और 13 अप्रैल को एकादशी तिथि दोपहर में 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के नियमों के अनुसार, एकादशी तिथि का व्रत तब किया जाता है जब उदयकाल में एकादशी तिथि लग रही हो। ऐसे में 13 मई को सुबह को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि लगी रहेगी। इसलिए अपरा एकादशी का व्रत 13 मई को ही रखा जाएगा। वहीं, एकादशी का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। 14 मई को द्वादशी तिथि लग रही है। इसलिए व्रत का पारण 14 तारीख में 11 बजकर 20 मिनट पर किया जाएगा।
अपरा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
=======================
अपरा शब्द का अर्थ है, जिसकी सीमा न हो। अर्थात इस दिन किया गया जप, तप, व्रत और दान अनंत गुना फल देने वाला होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि जो साधक श्रद्धा और नियमपूर्वक इस एकादशी का व्रत करता है, उसके समस्त पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।
यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए कल्याणकारी मानी जाती है, जो अपने जीवन में किए गए जाने-अनजाने पापों से मुक्ति चाहते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से ब्रह्महत्या, परनिंदा, असत्य भाषण और अन्य गंभीर दोषों से भी मुक्ति मिलती है। साथ ही, यह व्रत साधक को मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
पूजा विधि
=========
अपरा एकादशी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर अच्छे से घर की सफाई करें। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और व्रत का संकल्प लें और साफ वस्त्र धारण करें। ।
इसके बाद हाथ में थोड़ा जल लेकर पूजा स्थल पर जल छिड़कें और व्रत पूरा करने का संकल्प लें।
अब एक लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उसपर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
अब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अभिषेक करके उन्हें नए वस्त्र अर्पित करें।
इसके बाद घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें। इसके बाद उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाएं।
एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और उन्हें भोग लगाकर परिवार जनों में प्रसाद बांट दें।
क्या करें और क्या न करें
=================
इस पावन दिन सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। फलाहार करें, मन को शांत रखें और भगवान के नाम का स्मरण करते रहें। जरूरतमंदों को जल, फल, अन्न या वस्त्र दान करना अत्यंत पुण्यकारी होता है।
वहीं इस दिन कुछ कार्यों से बचना भी आवश्यक है; जैसे चावल का सेवन, तामसिक भोजन, क्रोध, निंदा और असत्य भाषण। इसके अलावा बाल और नाखून काटना, दोपहर में सोना और तुलसी के पत्ते तोड़ना भी वर्जित माना गया है।
इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और साधक के ऊपर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
अपरा एकादशी पर दान का महत्व
======================
सनातन परंपरा में दान को सर्वोत्तम कर्म माना गया है। साथ ही अपरा एकादशी जैसे पुण्यदायी मौके पर इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है और जीवन के कष्टों को दूर करता है।
इस पावन अवसर पर ब्राह्मणों, दीन-हीन, असहाय और जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, अन्न और धन का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से भूखे को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य कार्य बताया गया है।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी दान के महत्व को बताते हुए कहा है-
तुलसी पंछी के पिये घटे न सरिता नीर।
दान दिये धन ना घटे जो सहाय रघुवीर।।
अर्थात् जिस प्रकार पक्षियों के पानी पीने से नदी का जल कम नहीं होता, उसी प्रकार यदि भगवान का आशीर्वाद आपके साथ है तो दान देने से आपके धन के भंडार में कभी कमी नहीं होती।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required