डाॅ. खूबचंद बघेल जयन्ती आज
डाॅ. खूबचंद बघेल जयन्ती आज
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छत्तीसगढ़ राज्य के स्वप्नदृष्टा और महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. खूबचंद बघेल (1900–1969) का जीवन संघर्ष, समाज सुधार और राष्ट्रीय चेतना की एक प्रेरणादायक गाथा है। उन्होंने जाति प्रथा, छुआछूत और अंधविश्वास को मिटाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
डॉ. बघेल की सामाजिक और साहित्यिक यात्रा की मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं:
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प्रारंभिक जीवन: रायपुर जिले के पथरी गाँव में जन्मे डॉ. बघेल ने चिकित्सा (MBBS) की पढ़ाई पूरी की, लेकिन देश सेवा और समाज सुधार के लिए डॉक्टरी का पेशा छोड़ दिया।
सामाजिक सुधार: उन्होंने समाज में व्याप्त असमानता के विरुद्ध ‘पंक्ति तोड़ो आंदोलन’ चलाया और ‘भारतवंशी जातीय’ संगठन बनाकर लोगों को जागरूक किया।
साहित्यिक योगदान: उन्होंने छत्तीसगढ़ी और हिंदी में कई प्रसिद्ध नाटकों की रचना की, जिनका मुख्य उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करना था।
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ऊँच-नींच: 1936 में लिखित यह नाटक छुआछूत और जाति प्रथा की बुराइयों पर आधारित था।
करम-छंडहा: यह सामाजिक नाटक आम आदमी की बेबसी और शोषण को उजागर करता है।
जनरैल सिंह: इस नाटक के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लोगों के दब्बूपन को दूर करने का संदेश दिया गया
भारतमाता: 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय रचित इस नाटक से धन एकत्रित करके भारत सरकार को भेजा गया था।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
