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एलादिवटी: रक्तपित्त से लेकर दमा और टीबी तक में प्रभावी आयुर्वेदिक औषधि

 

आयुर्वेद में कई ऐसी पारंपरिक औषधियाँ हैं जो एक साथ अनेक गंभीर रोगों पर प्रभाव डालती हैं।
एलादिवटी, जिसका उल्लेख अष्टाङ्ग संग्रह में मिलता है, ऐसी ही एक शक्तिशाली औषधि है।
यह वटी त्रिदोष को संतुलित करती है और विशेष रूप से रक्तपित्त, श्वास रोग और शरीर की कमजोरी में अत्यंत लाभकारी मानी गई है।
🌸 एलादिवटी के प्रमुख घटक
इस वटी को शुद्ध औषधीय द्रव्यों से तैयार किया जाता है:
दालचीनी — 5 ग्राम
छोटी इलायची — 5 ग्राम
तेजपात — 5 ग्राम
पिप्पली — 20 ग्राम
मुनक्का — 40 ग्राम
महुआ पुष्प — 40 ग्राम
खजूर — 40 ग्राम
सभी को कूट-छानकर चूर्ण बनाकर शुद्ध शहद में मिलाया जाता है और 5 ग्राम की गोलियाँ तैयार की जाती हैं।
💊 सेवन विधि
👉 सुबह 1 गोली और शाम 1 गोली
👉 गोली को मुंह में रखकर धीरे-धीरे घुलने दें
👉 पानी से तुरंत न निगलें
इस विधि से औषधि सीधे श्वसन तंत्र और रक्त प्रवाह पर प्रभाव करती है।
🌿 गुण एवं औषधीय प्रभाव
एलादिवटी को आयुर्वेद में:
✔️ वृष्य (शक्ति वर्धक)
✔️ त्रिदोषशामक
✔️ विशेष रूप से रक्तपित्त नाशक
माना गया है।
यह शरीर को अंदर से बल देती है और रक्तस्राव संबंधी विकारों को नियंत्रित करती है।
🩺 किन रोगों में एलादिवटी विशेष लाभकारी है?
एलादिवटी का प्रयोग निम्न रोगों में अत्यंत प्रभावी माना गया है:
✅ रक्तपित्त (नाक, मुंह, मूत्र, मल, थूक से खून आना)
✅ पुरानी खांसी
✅ दमा (श्वास रोग)
✅ उल्टी और अरुचि
✅ चक्कर और बेहोशी
✅ हिचकी
✅ टीबी (क्षय रोग)
✅ गला बैठना
✅ फेफड़ों में घाव
✅ तिल्ली का बढ़ना
✅ शरीर का अत्यधिक सूखापन
✅ वातरक्त
✅ हृदयरोग
✅ पुराना बुखार
✅ बार-बार प्यास लगना
✅ छाती में दर्द (पार्श्वशूल)
📌 विशेष सावधानियाँ
✔️ औषधि का सेवन नियमित और धैर्यपूर्वक करें
✔️ आयुर्वेदिक परहेज़ का पालन करें
✔️ अत्यधिक तला-भुना और नशीले पदार्थों से बचें
सही आहार-विहार के साथ यह वटी अमृत समान लाभ देती है।
एलादिवटी केवल एक औषधि नहीं, बल्कि आयुर्वेद का बहुउपयोगी रसायन है।
रक्त विकारों से लेकर श्वसन रोगों तक, यह शरीर को अंदर से स्वस्थ और मजबूत बनाती है।
नियमित सेवन और संयमित जीवनशैली के साथ इसके परिणाम अत्यंत प्रभावशाली होते हैं।

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