गोगा पंचमी आज
गोगा पंचमी आज
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गोगा पंचमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन राजस्थान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोक देवता वीर गोगाजी (जाहरवीर गोगा पीर) की पूजा की जाती है। यह त्योहार मुख्य रूप से नाग पंचमी के बाद आता है और इसके चार दिन बाद प्रसिद्ध ‘गोगा नवमी’ मनाई जाती है।
गोगा पंचमी का महत्व
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सर्प रक्षा: गोगाजी को सांपों का देवता माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से सर्पदंश (सांप के काटने) का डर नहीं रहता और रक्षा होती है।
संतान सुख: महिलाएँ अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की रक्षा के लिए यह व्रत और पूजा करती हैं।
पूजन विधि
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दीवार पर अंकन: इस दिन घरों की दीवारों पर गोबर, गेरू या दूध में घुले कोयले से सांप (नाग देवता) के प्रतीक चिन्ह या छापे बनाए जाते हैं।
भोग व अर्पण: गोगाजी और नाग देवता को ठंडे दूध, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित किए जाते हैं।
कथा श्रवण: कई जगहों पर गोगाजी की वीर गाथा और कथा सुनी जाती है।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
