हड़जोड़ या अस्थिसंधानक: हड्डियों को जोड़ने वाली आयुर्वेदिक औषधि
हड़जोड़ या अस्थिसंधानक: हड्डियों को जोड़ने वाली आयुर्वेदिक औषधि
हड़जोड़, जिसे अस्थिसंधानक के नाम से भी जाना जाता है, एक अत्यंत प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। इसका वानस्पतिक नाम Cissus quadrangularis है और यह अंगूर (Vitaceae) परिवार का बहुवर्षीय पौधा है। इसका उपयोग प्राचीन काल से टूटी हड्डियों को जोड़ने और हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के लिए किया जाता रहा है।
हड़जोड़ का स्वरूप और पहचान
हड़जोड़ की बेल खंडाकार, चतुष्कोणीय (चार कोनों वाला) तना लिए होती है, जिसकी लंबाई लगभग 6 इंच तक होती है। प्रत्येक खंड से नया पौधा विकसित हो सकता है। इसके तने पर:
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दिल के आकार की हरी पत्तियाँ
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छोटे-छोटे फूल
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लाल रंग के मटर जैसे फल
पौधे में बरसात के मौसम में फूल आते हैं और सर्दियों में फल लगते हैं, जिससे इसकी पहचान आसान हो जाती है।
कहां पाया जाता है हड़जोड़?
हड़जोड़ भारत के कई हिस्सों में पाया जाता है, लेकिन दक्षिण भारत और श्रीलंका में इसके तने को सब्जी (साग) के रूप में भी उपयोग किया जाता है। यह पौधा गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है।
हड़जोड़ के पोषक तत्व
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार हड़जोड़ में निम्न महत्वपूर्ण खनिज तत्व पाए जाते हैं:
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कैल्शियम कार्बोनेट
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फॉस्फेट
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सोडियम
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पोटैशियम
ये सभी तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने और जल्दी फ्रैक्चर जुड़ने में सहायक होते हैं।
हड़जोड़ के प्रमुख औषधीय लाभ
हड़जोड़ को आयुर्वेद में एक रामबाण औषधि माना गया है, विशेष रूप से हड्डी रोगों के लिए। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
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✅ टूटी हड्डी जल्दी जोड़ने में सहायक
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✅ हड्डियों की कमजोरी दूर करता है
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✅ बवासीर (पाइल्स) में लाभदायक
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✅ वातरक्त (गठिया) में उपयोगी
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✅ कृमिरोग (पेट के कीड़े) में सहायक
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✅ नाक से खून बहना रोकता है
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✅ कान से स्राव (बहना) में उपयोगी
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✅ कफ और वात दोष का नाश करता है
हड़जोड़ का उपयोग कैसे किया जाता है?
आयुर्वेद में मुख्य रूप से इसके तने (स्टेम) का ही उपयोग किया जाता है। ताजे तने का स्वरस (रस) निकालकर सेवन किया जाता है।
✅ निर्धारित मात्रा:
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10 से 20 मिलीलीटर स्वरस प्रतिदिन
⚠️ ध्यान दें: किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन चिकित्सक की सलाह से ही करें।
हड़जोड़ यानी अस्थिसंधानक एक चमत्कारी आयुर्वेदिक पौधा है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने, फ्रैक्चर जल्दी जोड़ने और कई गंभीर रोगों में लाभ पहुंचाने वाला सिद्ध हुआ है। इसके नियमित और सही उपयोग से शरीर को प्राकृतिक शक्ति मिलती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
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