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वात प्रकृति वाले क्या इसबगोल ले सकते हैं? कब्ज में सही तरीका और आयुर्वेदिक सच

 

अगर आपकी प्रकृति वात की है और आपको बार-बार कब्ज, गैस, पेट फूलना, जोड़ों में कड़क-कड़क की आवाज़ और शरीर में रूखापन महसूस होता है —
तो एक सवाल जरूर मन में आता होगा:
👉 कब्ज में इसबगोल लेना सही है या नहीं?
कई लोगों को डर रहता है कि इसबगोल ठंडी तासीर का होता है, कहीं इससे वात और न बढ़ जाए।
कुछ लोग सोचते हैं कि इससे आदत पड़ जाती है या पेट और ज्यादा खराब हो सकता है।
आज इस लेख में हम आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान — दोनों के आधार पर इस पूरे कन्फ्यूजन को दूर करेंगे और बताएंगे इसबगोल लेने का सबसे सुरक्षित तरीका खासकर वात प्रकृति वालों के लिए।
🌾 क्या वात प्रकृति वाले इसबगोल ले सकते हैं?
सीधा जवाब है — हाँ, बिल्कुल ले सकते हैं।
बल्कि सही तरीके से लिया जाए तो इसबगोल वात से होने वाली कब्ज में सबसे असरदार प्राकृतिक उपायों में से एक है।
आयुर्वेद के अनुसार इसबगोल का स्वाद मधुर (मीठा) होता है और इसका पाचन के बाद प्रभाव भी मधुर ही रहता है —
और मीठा स्वाद वात दोष को शांत करता है।
वात की सबसे बड़ी समस्या है रूखापन।
जब आंतें सूख जाती हैं तो मल सख्त हो जाता है और कब्ज होती है।
इसबगोल में दो खास गुण होते हैं:
✔️ स्निग्ध — आंतों में नमी लाने वाला
✔️ पिच्छिल — मल को फिसलन देने वाला
यही वजह है कि यह कब्ज को जड़ से सुधारता है।
❄️ ठंडी तासीर से वात बढ़ेगा या नहीं?
यह सच है कि इसबगोल ठंडे प्रभाव वाला होता है।
अगर इसे ठंडे पानी के साथ लिया जाए तो गैस, दर्द और सूजन बढ़ सकती है।
लेकिन आयुर्वेद कहता है — औषधि किसके साथ ली जाती है, उससे उसका प्रभाव बदल जाता है।
जब इसे:
🥛 गर्म दूध
🧈 देसी घी
के साथ लिया जाता है, तो उसकी ठंडी तासीर पूरी तरह संतुलित हो जाती है और वात शांत हो जाता है।
🔁 क्या इसबगोल की आदत पड़ जाती है?
इसबगोल कोई केमिकल लैक्सेटिव नहीं है।
यह सिर्फ प्राकृतिक फाइबर है जो मल को बाहर निकालने में मदद करता है।
✔️ इसकी नशे जैसी लत नहीं लगती
लेकिन लंबे समय तक रोज़ लेने से यह शरीर में कैल्शियम और आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है।
इसलिए वात प्रकृति वालों को इसे जरूरत के समय ही लेना चाहिए, रोज़ाना आदत नहीं बनानी चाहिए।
⭐ वात प्रकृति के लिए इसबगोल लेने का सही तरीका (Golden Method)
👉 एक गिलास गर्म दूध लें
👉 उसमें 1 चम्मच देसी घी मिलाएं
👉 फिर 1 चम्मच इसबगोल डालकर तुरंत पी लें
अगर दूध नहीं पचता तो:
🔥 गर्म पानी + घी + इसबगोल
घी बहुत जरूरी है — यही वात का सबसे बड़ा संतुलनकारी तत्व है।
⛔ कब इसबगोल नहीं लेना चाहिए?
अगर आपको:
❗ जीभ पर सफेद परत
❗ बदबूदार, चिपचिपा मल
❗ भारीपन और आलस्य
महसूस हो — तो शरीर में आम (टॉक्सिन्स) जमा हैं।
ऐसी स्थिति में पहले पाचन सुधारें —
जीरा पानी, सोंठ पानी लें — फिर इसबगोल शुरू करें।

✔️ वात प्रकृति वाले इसबगोल ले सकते हैं
✔️ सही तरीके से लेने पर यह रामबाण साबित होता है
✔️ ठंडे पानी से बचें
✔️ रोज़ की आदत न बनाएं
✔️ रात को सोने से पहले लेना सबसे बेहतर है

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