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सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी में) “धर्मराजनिरुपण” नामक {चौदहवां अध्याय}

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी में) “धर्मराजनिरुपण” नामक {चौदहवां अध्याय} यमलोक एवं यम सभा का वर्णन, चित्रगुप्त आदि के भवनों का परिचय, धर्मराज नगर के चार द्वार, पुण्यात्माओं का धर्म सभा में प्रवेश गरुड़ उवाच गरुड़ जी ने कहा – हे दयानिधे ! यमलोक कितना बड़ा है? कैसा है? किसके द्वारा [...]

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी में) {तेरहवां अध्याय} “सपिण्डनादि-सर्वकर्मनिरुपण” नामक

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी में) “सपिण्डनादि-सर्वकर्मनिरुपण” नामक {तेरहवां अध्याय} अशौचकाल का निर्णय, अशौच में निषिद्ध कर्म, सपिण्डीकरण श्राद्ध, पिण्डमेलन की प्रक्रिया, शय्यादान, पददान तथा गया श्राद्ध की महिमा गरुड़ उवाच गरुड़जी ने कहा – हे प्रभो! सपिण्डन की विधि, सूतक का निर्णय और शय्यादान तथा पददान की सामग्री एवं उनकी [...]

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण अध्याय 12 : एकादशाहविधिनिरूपण

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी) अध्याय 12 : एकादशाहविधिनिरूपण एकादशाहकृत्य-निरुपण, मृत-शय्यादान, गोदान, घटदान, अष्टमहादान, वृषोत्सर्ग, मध्यमषोडशी, उत्तमषोडशी एवं नारायणबलि गरुड़ उवाच गरुड़जी ने कहा – हे सुरेश्वर ! ग्यारहवें दिन के कृत्य-विधान को भी बताइए और हे जगदीश्वर! वृषोत्सर्ग की विधि भी बताइये। श्रीभगवानुवाच श्रीभगवान ने कहा – ग्यारहवें दिन प्रात:काल [...]

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण अध्याय 11 : दशगात्रविधिनिरूपण

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी) अध्याय 11 : दशगात्रविधिनिरूपण दशगात्र – विधान गरुड़ उवाच गरुड़ जी बोले – हे केशव ! आप दशगात्र विधि के संबंध में बताइए, इसके करने से कौन-सा पुण्य प्राप्त होता है और पुत्र के अभाव में इसको किसे करना चाहिए। श्रीभगवानुवाच श्रीभगवान बोले – हे तार्क्ष्य [...]

माता श्रीमहाकाली एकाक्षरी मन्त्र साधना

माता श्रीमहाकाली एकाक्षरी मन्त्र साधना 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों में से मां काली भी एक स्वरूप है। महाकाली के रूप को देवी के सभी रूपों में से सबसे शक्तिशाली माना जाता है। काली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘काल’ शब्द से हुई है। हिन्दू शास्त्रों में मां काली [...]

श्रीमच्छङ्कराचार्य विरचितं श्रीकालिकाष्टकम् (सानुवाद सहित)

श्रीमच्छङ्कराचार्य विरचितं श्रीकालिकाष्टकम् (सानुवाद सहित) 🕉 परिचय श्रीकालिकाष्टकम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक महान स्तोत्र है, जिसमें माँ काली के विविध अद्भुत और रहस्यमयी स्वरूपों का वर्णन किया गया है। इसमें ध्यान, स्तुति, और फलश्रुति सभी का समावेश है। भक्त यदि श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करें तो उन्हें सिद्धि, कल्याण और [...]