Search for:
  • Home/
  • Tag: #सनातनधर्म

चातुर्मास और आयुर्वेद: इन चार महीनों में खान-पान के विशेष नियम क्यों बताए गए हैं?

चातुर्मास और आयुर्वेद: इन चार महीनों में खान-पान के विशेष नियम क्यों बताए गए हैं? सनातन धर्म में चातुर्मास अत्यंत पवित्र और साधना का काल माना जाता है। यह अवधि सामान्यतः आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक रहती है। इन चार महीनों [...]

सावन 2026: व्रत नहीं रख पाए तो क्या करें? जानिए भगवान शिव की पूजा के सरल उपाय

सावन 2026: व्रत नहीं रख पाए तो निराश न हों, ऐसे मिलेगा भगवान शिव का आशीर्वाद श्रावण (सावन) का पवित्र महीना भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस पूरे मास में श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं, “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हैं [...]

मैं कौन हूँ? राजा और सन्यासी की प्रेरणादायक कथा | आत्मज्ञान और ईश्वर की खोज

मैं कौन हूँ? राजा और सन्यासी की प्रेरणादायक कथा: आत्मज्ञान ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा प्रश्न है—“मैं कौन हूँ?” अधिकांश लोग अपने नाम, पद, धन, परिवार या शरीर को ही अपनी पहचान मान लेते हैं। लेकिन क्या यही हमारा वास्तविक स्वरूप है? भारतीय आध्यात्मिक [...]

महिषासुर वध की कथा: सामूहिक शक्ति (Synergy), स्त्री शक्ति और नेतृत्व का सनातन संदेश

महिषासुर वध: सामूहिक शक्ति (Synergy), स्त्री शक्ति और धर्म की विजय का सनातन संदेश सनातन धर्म में माँ दुर्गा केवल एक देवी नहीं, बल्कि संगठित चेतना, अटूट संकल्प और धर्म की रक्षा के लिए जागृत दिव्य शक्ति का प्रतीक हैं। महिषासुर वध का प्रसंग केवल देवासुर संग्राम की कथा नहीं [...]

दक्ष यज्ञ का विनाश: वीरभद्र और विष्णु के दिव्य युद्ध की अद्भुत कथा (शिव रहस्य आधारित प्रसंग)

दक्ष यज्ञ का विनाश: वीरभद्र और विष्णु के दिव्य युद्ध की अद्भुत कथा (शिव रहस्य आधारित प्रसंग) दक्ष यज्ञ की कथा हिंदू पौराणिक इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रहस्यमयी प्रसंग है, जिसमें अहंकार, भक्ति और दिव्य शक्ति का भयंकर संघर्ष देखने को मिलता है। यह कथा “शिव रहस्य” ग्रंथ [...]

गंगाजल घर में रखने के 9 महत्वपूर्ण नियम: जानें धार्मिक मान्यता, लाभ और श्रीगंगालहरी स्तोत्र का महत्व

गंगाजल घर में रखने के 9 महत्वपूर्ण नियम, धार्मिक लाभ एवं श्रीगंगालहरी स्तोत्र का महत्व भूमिका सनातन धर्म में माँ गंगा को केवल एक पवित्र नदी नहीं, बल्कि मोक्षदायिनी, पाप-नाशिनी और दिव्य शक्ति का स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि घर में श्रद्धापूर्वक गंगाजल रखने से वातावरण की [...]