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सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी में) “मोक्षधर्मनिरूपण” नामक {सोलहवां अध्याय}

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी में) “मोक्षधर्मनिरूपण” नामक {सोलहवां अध्याय} मनुष्य शरीर प्राप्त करने की महिमा, धर्माचरण ही मुख्य कर्तव्य, शरीर और संसार की दु:खरूपता तथा नश्वरता, मोक्ष-धर्म-निरूपण गरुड़ उवाच गरुड़ जी ने कहा – हे दयासिन्धो ! अज्ञान के कारण जीव जन्म-मरणरूपी संसार चक्र में पड़ता है, यह मैंने सुना। [...]

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण अध्याय 12 : एकादशाहविधिनिरूपण

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी) अध्याय 12 : एकादशाहविधिनिरूपण एकादशाहकृत्य-निरुपण, मृत-शय्यादान, गोदान, घटदान, अष्टमहादान, वृषोत्सर्ग, मध्यमषोडशी, उत्तमषोडशी एवं नारायणबलि गरुड़ उवाच गरुड़जी ने कहा – हे सुरेश्वर ! ग्यारहवें दिन के कृत्य-विधान को भी बताइए और हे जगदीश्वर! वृषोत्सर्ग की विधि भी बताइये। श्रीभगवानुवाच श्रीभगवान ने कहा – ग्यारहवें दिन प्रात:काल [...]

सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी में) छठा अध्याय

गरुड़ उवाच गरुड़ जी ने कहा – हे केशव ! नरक से आया हुआ जीव माता के गर्भ में कैसे उत्पन्न होता है? वह गर्भवास आदि के दु:खों को जिस प्रकार भोगता है, वह सब भी मुझे बताइए। विष्णुरुवाच भगवान विष्णु ने कहा – स्त्री और पुरुष के संयोग से [...]