तान्हा पोला आज
तान्हा पोला आज
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तान्हा पोला मुख्य रूप से महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र (विशेषकर नागपुर) और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाने वाला बच्चों का एक अनूठा और पारंपरिक त्योहार है। यह त्योहार बड़े बैलों के त्योहार ‘बैल पोला’ के ठीक अगले दिन मनाया जाता है। वर्ष 2026 में तान्हा पोला 11 सितंबर से 12 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है।
इस त्योहार से जुड़ी मुख्य बातें:
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बच्चों का मुख्य आकर्षण:
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इस दिन छोटे बच्चे मिट्टी या लकड़ी से बने नकली बैलों (जिन्हें नंदी बैल या लाकड़ी बैल कहा जाता है) को सुंदर तरीके से सजाते हैं। वे इन पहियेदार खिलौना-बैलों को रस्सी से खींचते हुए गलियों और बाजारों में जुलूस निकालते हैं।
ऐतिहासिक महत्व:
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इस अनूठी परंपरा की शुरुआत नागपुर के भोसले राजघराने के राजा श्रीमंत राजे रघुजी महाराज भोसले (द्वितीय) द्वारा की गई थी। कृषि प्रधान संस्कृति में बच्चों को बचपन से ही पशुओं और बैलों के प्रति सम्मान व प्रेम सिखाने के उद्देश्य से इस खेल-खेल वाले त्योहार को शुरू किया गया था।
पूजा और उपहार (बोजारा):
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बच्चे अपने इन लकड़ी के बैलों को घर-घर और स्थानीय बाजारों में ले जाते हैं। लोग इन बैलों का पूजन करते हैं और बच्चों को उपहार या पैसे देते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में ‘बोजारा’ कहा जाता है।
प्रतियोगिताएं:
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कई जगहों पर इस दिन बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस और सबसे सुंदर सजे हुए लकड़ी के बैल की प्रतियोगिताएं भी रखी जाती हैं, जिसमें जीतने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया जाता है।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद्
